Cabinet Expansion in West Bengal: पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज है, इसी बीच मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात की।
Suvendu Adhikari R N Ravi Meeting: पश्चिम बंगाल में नवगठित भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने बुधवार को लोक भवन में राज्यपाल आर एन रवि से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, बैठक आधे घंटे से अधिक चली, लेकिन उसमें क्या चर्चा हुई, इसकी तत्काल जानकारी नहीं मिल पाई है। सीएम की रवि से यह मुलाकात राज्य में नवगठित भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच हुई है।
शुभेन्दु अधिकारी ने नौ मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पीएम नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के अन्य शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ पांच अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली थी। भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द विस्तार होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार नए मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और प्रस्तावित नामों को इस सप्ताह के अंत तक राजभवन भेजा जा सकता है।
पार्टी नेतृत्व ने हालांकि संभावित मंत्रियों के बारे में चुप्पी साध रखी है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह विस्तार संतुलित दृष्टिकोण के साथ किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ विभिन्न जाति और आदिवासी समुदायों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।
सूत्रों ने बताया कि कुछ अप्रत्याशित नामों के शामिल होने की उम्मीद है, लेकिन मंत्रिमंडल का आकार अपेक्षाकृत छोटा रहने की संभावना है। चूंकि शुभेन्दु अधिकारी, तापस रॉय और निशीथ प्रमाणिक को छोड़कर अधिकांश नव निर्वाचित भाजपा विधायकों के पास राज्य या केंद्र स्तर पर पूर्व मंत्री पद का अनुभव है, इसलिए प्रशासनिक क्षमता और शासन दक्षता चयन प्रक्रिया में प्रमुख मानदंड बनकर उभरे हैं।
ऐसा माना जा रहा है कि अंतिम निर्णयों में राजनीतिक कारक भी भूमिका निभा रहे हैं। मंत्रिमंडल के पहले चरण का शपथ ग्रहण समारोह में शुभेन्दु अधिकारी ने दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। प्रशासनिक कार्यभार बढ़ने के कारण, इन मंत्रियों द्वारा वर्तमान में संभाले जा रहे कई विभागों को नए मंत्रियों के बीच पुनर्वितरित किए जाने की संभावना है।
गृह और सूचना एवं संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री के पास ही रहने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहने वाले जिलों के विधायकों को मंत्री पद दिए जाने की संभावना है। कैबिनेट मंत्रियों के अलावा कई राज्य मंत्रियों की नियुक्ति की भी उम्मीद है।
इस बीच इस बात के भी प्रबल संकेत हैं कि भाजपा सरकार प्रशासनिक दक्षता में सुधार के लिए शिक्षा विभाग का व्यापक पुनर्गठन करने की योजना बना रही है। नई भाजपा सरकार अब स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग पूर्ण मंत्रियों की नियुक्ति करके पुरानी संरचना को बहाल करने की योजना बना रही है।
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार वाम मोर्चा शासन के दौरान अपनाई गई पुरानी व्यवस्था पर लौट सकती है, जिसके तहत स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा दो अलग-अलग विभाग थे और उनके लिए स्वतंत्र कैबिनेट मंत्री नियुक्त किए जाते थे। वामपंथी शासन के दौरान, कांति विश्वास और पार्थ दे जैसे नेताओं ने स्कूली शिक्षा का कार्यभार संभाला, जबकि सत्यसाधन चक्रवर्ती और सुदर्शन रायचौधरी उच्च शिक्षा मंत्री रहे।
साल 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद शुरुआत में दोनों विभाग अलग-अलग कार्य करते रहे, जिनमें रवींद्रनाथ भट्टाचार्य स्कूली शिक्षा और ब्रात्य बसु उच्च शिक्षा के प्रभारी थे। बाद में दोनों विभागों को एक ही शिक्षा विभाग में मिला दिया गया, जिसके अधीन एक ही कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया गया। यह पद पहले पार्थ चटर्जी और बाद में ब्रात्य बसु के पास रहा।
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