राष्ट्रीय

ईद से पहले जीव हत्या नियमों के खिलाफ महुआ मोइत्रा पहुंचीं अदालत, क्या रुक जाएगा सरकार का आदेश ?

Eid-ul-Azha : पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा ईद-उल-अजहा से पहले मवेशियों के वध को लेकर जारी की गई नई अधिसूचना को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा सहित अन्य याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस फैसले से धार्मिक स्वतंत्रता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।

3 min read
May 20, 2026
टीएमसी सांसद महुआ मोहित्रा । ( फोटो: ANI)

Calcutta High Court: पश्चिम बंगाल में ईदुल-अजहा (बकरीद) के त्योहार से ठीक पहले मवेशियों के वध को रोकने वाले सरकारी आदेश पर कानूनी और सियासी विवाद तेज हो गया है। राज्य सरकार की हालिया अधिसूचना को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका को अदालत के समक्ष लाने वालों में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। बुधवार को हुई इस मामले की पहली सुनवाई ने राज्य के प्रशासनिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों बढ़ा विवाद ?

पश्चिम बंगाल सरकार ने ईद के त्योहार को देखते हुए मवेशियों के वध और उनके परिवहन को लेकर कुछ कड़े नियम और दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन का तर्क है कि इन नियमों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और पशु कल्याण मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने सरकार के इस कदम को सीधे तौर पर एकतरफा और पारंपरिक अधिकारों का हनन बताया है। अदालत में इस अधिसूचना की वैधता को परखने के लिए विस्तृत कानूनी दलीलें पेश की गई हैं।

धार्मिक स्वतंत्रता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चोट का दावा

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि ईद-उल-अजहा के दौरान मवेशियों की कुर्बानी सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा रही है। सरकार द्वारा अचानक लगाए गए ये प्रतिबंध नागरिकों को संविधान द्वारा दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को प्रभावित करते हैं।

याचिका में आर्थिक पहलू भी उठाए गए

इसके साथ ही, याचिका में इसके आर्थिक पहलुओं को भी प्रमुखता से उठाया गया है। वकीलों ने तर्क दिया कि बंगाल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पशुपालन और मवेशियों के व्यापार पर निर्भर करता है। त्योहारों के सीजन में यह व्यापार अपने चरम पर होता है। ऐसे में कड़े नियमों के कारण छोटे किसानों, स्थानीय व्यापारियों और मांस उद्योग से जुड़े दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर सीधा और गहरा संकट आ खड़ा होगा।

प्रशासनिक व्यवस्था के तहत लागू किया गया : अदालत में सरकार का पक्ष

दूसरी ओर, राज्य सरकार के कानूनी प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। नियमों को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था के तहत लागू किया गया है ताकि त्योहार के दौरान स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को बनाए रखा जा सके। अदालत अब दोनों पक्षों के दावों का बारीकी से अध्ययन कर रही है।

राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाएं

इस मामले पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार वोट बैंक और तुष्टिकरण के संतुलन में उलझी हुई है, जबकि किसान संगठनों ने चिंता जताई है कि बिना सोचे-समझे लिए गए ऐसे प्रशासनिक फैसलों से ग्रामीण बाजारों में मंदी का माहौल बन सकता है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने राज्य सरकार से इस अधिसूचना को लागू करने के व्यावहारिक तौर-तरीकों पर जवाब मांगा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोर्ट त्योहार से पहले इस आदेश पर अंतरिम रोक लगाता है या नहीं।

प्रशासनिक रेगुलेशन के लिए एक नया उदाहरण सेट करने की कोशिश

बहरहाल, इस पूरे विवाद का एक कानूनी पहलू यह भी है कि देश के विभिन्न राज्यों में पशु संरक्षण कानूनों और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच टकराव के मामले पहले भी सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं। पश्चिम बंगाल का यह मामला आने वाले समय में त्योहारों से जुड़े प्रशासनिक रेगुलेशन के लिए एक नया उदाहरण सेट कर सकता है।

यह सुनवाई ईद से पहले होगी या बाद में होगी ?

गौरतलब है ​कि अदालत की अगली सुनवाई की सटीक तारीख का जो शेड्यूल तय किया जाएगा, उसी से स्पष्ट होगा कि यह ईद से पहले होगी या बाद में होगी। वैसे आमतौर पर ऐसे संवेदनशील और त्योहारों से जुड़े मामलों में, जहाँ किसी अधिसूचना को चुनौती दी गई हो, अदालतें त्योहार से पहले ही अंतरिम राहत या अंतिम आदेश पर विचार करने के लिए जल्द सुनवाई की तारीख तय करती हैं। हालांकि, कोर्ट के आधिकारिक आदेश पत्र में तारीख अपडेट होने के बाद ही इसकी स्थिति साफ हो पाएगी।

Also Read
View All