20 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

केरल के मंत्रियों को भूत का डर या अंधविश्वास, नए मंत्रियों में से किसी ने भी नहीं ली 13 नंबर की कार, जानिए इस नंबर का सच

पढ़े-लिखे केरल के मंत्रियों में '13' नंबर की गाड़ी को लेकर ऐसा खौफ है कि नई कैबिनेट के शपथ लेते ही इस गाड़ी को अछूता छोड़ दिया गया। अंधविश्वास के चलते मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के किसी भी मंत्री ने इस नंबर को छूने तक से साफ इनकार कर दिया।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Ankit Sai

May 20, 2026

आज भी ‘13’ नंबर से डरते हैं नेता

केरल में आज भी नेता 13 नंबर से डरते हैं

Kerala Ministers Car Number 13: केरल में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली नई यूडीएफ (UDF) सरकार के गठन के बाद एक अनोखा विवाद सामने आया है। पढ़े-लिखे मंत्रियों में '13' नंबर को लेकर ऐसा खौफ दिखा कि 21 सदस्यीय कैबिनेट में से किसी ने भी 13 नंबर की आधिकारिक गाड़ी लेने की हिम्मत नहीं दिखाई। पौराणिक मान्यताओं के चलते 13 नंबर को अशुभ माना जाता है। अंधविश्वास का यह खेल केरल हाईकोर्ट में भी रहा है, जहां कोर्ट नंबर 13 का नाम बदलकर '12A' कर दिया गया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार भी लगाई थी।

21 मंत्री लेकिन गाड़ी नंबर 13 नहीं

केरल में नई यूडीएफ (UDF) सरकार का गठन हो चुका है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व में 21 सदस्यीय कैबिनेट ने सोमवार को पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस नई सरकार में 14 चेहरे पहली बार मंत्री बने हैं, जिनमें दो महिलाएं और दो अनुसूचित जाति समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हैं। जैसे ही मंत्रियों को विभागों के साथ उनकी सरकारी गाड़ियां बांटी गईं, वैसे ही सचिवालय के गलियारों में सन्नाटा पसर गया। सरकारी गाड़ियों की लिस्ट से आधिकारिक कार नंबर 13 पूरी तरह गायब थी। दरअसल, इस नंबर को लेकर फैला अंधविश्वास इतना गहरा है कि किसी भी मंत्री ने इसे अपनी आधिकारिक गाड़ी के रूप में चुनने की हिम्मत नहीं दिखाई।

जानिए क्यों डरे हैं केरल के मंत्री 13 नंबर से

केरल में अंधविश्वास और राजनीति का यह गठजोड़ बेहद पुराना है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब यूडीएफ सरकार के मंत्रियों में 13 नंबर को लेकर यह डर दिखा हो। इतिहास गवाह है कि पिछली बार भी, जब साल 2011 से साल 2016 के बीच केरल में UDF सत्ता में थी, तब भी बदकिस्मत 13 नंबर को लेने वाला कोई नहीं था। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या वामपंथी सरकार इस मामले में ज्यादा साहसी थी?

आखिर क्या है 13 नंबर का पुराना इतिहास

केरल की राजनीति में एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ के बीच का यह अंतर साफ दिखाई देता है। पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार के पिछले दो कार्यकालों में इस नंबर को लेकर कोई झिझक नहीं थी। साल 2016 में तत्कालीन वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने खुद आगे बढ़कर 13 नंबर की सरकारी कार ली थी। वहीं विजयन सरकार के दूसरे कार्यकाल में कृषि मंत्री पी प्रसाद ने इसी 13 नंबर की गाड़ी का इस्तेमाल किया था। इतना ही नहीं, साल 2006 में वीएस अच्युतानंदन की सरकार के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री और वर्तमान माकपा महासचिव एमए बेबी भी बेखौफ होकर इसी 13 नंबर की आधिकारिक गाड़ी में घूमते थे। लेकिन जैसे ही सत्ता बदली, मंत्रियों का यह डर फिर से वापस आ गया।

हाईकोर्ट में कैसे 13 बना गया 12A रूम जानिए पूरी कहानी

अंधविश्वास का यह खेल सिर्फ मंत्रियों की गाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि केरल हाईकोर्ट भी लंबे समय तक इस विवाद में फंसा रहा। हाईकोर्ट की पुरानी इमारत में साल 1995 तक कोर्ट रूम नंबर 13 हुआ करता था, लेकिन बाद में उसका नाम बदलकर '12A' कर दिया गया। यह मामला तब खुला जब कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई, जिसमें बताया गया कि ईसा मसीह के अंतिम भोज (Last Supper) में 13वें मेहमान के शामिल होने की वजह से ईसाई मान्यताओं में इसे अशुभ माना जाता है।

हालांकि हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया था, लेकिन नवंबर साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल की पीठ ने केरल हाईकोर्ट को फटकार लगाते हुए साफ शब्दों में कहा था कि 'हाई कोर्ट एक संस्था है। इसे इस तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।' उधर सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद भी केरल हाईकोर्ट में कोर्ट नंबर 13 की वापसी कभी नहीं हो सकी। नई इमारत में इस विवाद से बचने के लिए कमरों के नाम नंबरों के बजाय अल्फाबेटिकल यानी ए, बी, सी के आधार पर रख दिए गए।