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CBSE तीन-भाषा नीति की नई गाइडलाइन, परीक्षा से ज्यादा तीसरी भाषा सीखने पर जोर

CBSE ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तीसरी भाषा लागू करने की डिटेल गाइडलाइन जारी कर दी है। वर्तमान कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को 10वीं बोर्ड में तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी। जानिए नई व्यवस्था, विदेशी भाषा पढ़ने वाले छात्रों और स्कूलों के लिए क्या हैं नए नियम।
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Updated: 30 Jun 2026, 3:11 AM IST
CBSE news
सीबीएसई की नई गाइडलाइन(फोटो-ANI)

CBSE Three Language Policy: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत तीसरी भाषा (आर-3) लागू करने को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी और इसका उद्देश्य विद्यार्थियों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव बढ़ाना नहीं, बल्कि बहुभाषी शिक्षा को सहज और प्रभावी बनाना है। संक्रमणकालीन व्यवस्था के तहत किसी भी छात्र को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसी के तहत वर्तमान कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर में पहुंचने पर तीसरी भाषा की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। इनका मूल्यांकन केवल स्कूल आधारित आंतरिक आकलन से किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा कक्षा 10 के विद्यार्थियों पर संशोधित तीन-भाषा नीति लागू नहीं होगी।

जानें डिटेल्स

नई व्यवस्था के अनुसार कक्षा 9 में प्रत्येक विद्यार्थी को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। हालांकि वर्तमान कक्षा 7, 8 और 9 के जिन विद्यार्थियों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुन रखी हैं, वे उन्हें जारी रख सकेंगे। उन्हें केवल एक अतिरिक्त भारतीय भाषा पढ़नी होगी। इस बदलाव को आसान बनाने के लिए सीबीएसई और एनसीईआरटी निर्धारित समयसीमा के भीतर स्तरानुकूल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएंगे। बोर्ड ने स्कूलों से नई व्यवस्था के बारे में विद्यार्थियों और अभिभावकों को सकारात्मक तरीके से जागरूक करने तथा बहुभाषी शिक्षा के दीर्घकालिक लाभों की जानकारी देने को भी कहा है।

इन विद्यार्थियों को मिलेगी राहत, स्कूलों के लिए भी विशेष प्रावधान

दिव्यांग (सीडब्ल्यूएसएन) विद्यार्थियों को आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 के तहत पहले से मिल रही सभी रियायतें और छूट यथावत जारी रहेंगी। विदेश स्थित सीबीएसई स्कूलों को तीसरी भारतीय भाषा लागू करने की अनिवार्यता से छूट रहेगी। विदेश से भारत लौटने वाले विद्यार्थियों के लिए भी तीसरी भारतीय भाषा पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। राज्य बदलने या अभिभावकों के स्थानांतरण की स्थिति में विद्यार्थी कक्षा 9 के बाद भी अपनी पहले चुनी गई तीसरी भाषा की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

शिक्षकों की भी होगी व्यवस्था


भाषा शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों, पीजीटी, सहोदया स्कूल समूहों के बीच शिक्षक साझा करने के साथ वर्चुअल और हाइब्रिड शिक्षण की व्यवस्था अपनाने की अनुमति दी गई है। बोर्ड ने स्कूलों से नई व्यवस्था के बारे में विद्यार्थियों और अभिभावकों को सकारात्मक ढंग से जागरूक करने तथा बहुभाषी शिक्षा के दीर्घकालिक लाभों की जानकारी देने को भी कहा है।

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30 Jun 2026, 3:11 AM IST
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