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32 साल बाद यमुना जल समझौते को मिली रफ्तार, मानसून का अतिरिक्त पानी अब पहुंचेगा राजस्थान के रेतीले इलाकों तक

Rajasthan Haryana Agreement: राजस्थान और हरियाणा के बीच 32 साल पुराने यमुना जल समझौते को नई रफ्तार मिली है। अब मानसून के दौरान 580 एमसीएम अतिरिक्त पानी पाइपलाइन के जरिए राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू तक पहुंचेगा। 34,102 करोड़ रुपये की इस परियोजना से दोनों राज्यों के लाखों लोगों को पेयजल का लाभ मिलेगा।
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जयपुर

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Anurag Animesh

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Updated: 30 Jun 2026, 2:10 AM IST

amuna Water Sharing

यमुना जल समझौता(फोटो-ANI)

Yamuna Water Agreement: राजस्थान और हरियाणा के बीच वर्ष 1994 में हुए यमुना जल बंटवारा समझौते को 32 साल बाद नई दिशा मिल गई है। अब मानसून के दौरान यमुना का अतिरिक्त पानी राजस्थान के उत्तरी जिलों तक पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्यव भवन में दोनों राज्यों के बीच मेमोरंडम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्या कहा?


समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि दोनों राज्यों के लोगों की पानी से जुड़ी तीन दशक पुरानी समस्या का समाधान हो गया है। उन्होंने इसे दोनों राज्यों के लिए 'विन-विन सिचुएशन' बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहकारी संघवाद के मंत्र का उत्कृष्ट उदाहरण है।

जानें डिटेल्स


अमित शाह ने बताया कि हर वर्ष जुलाई से अक्टूबर के बीच मानसून के दौरान लगभग 580 एमसीएम अतिरिक्त पानी यमुना नहर से 3.6 मीटर व्यास की तीन भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक उपयोग में नहीं आ रहा यह अतिरिक्त पानी लोगों की प्यास बुझाने के साथ-साथ बड़े जलाशयों में संग्रहित किया जाएगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह जल समझौता भविष्य में अंतरराज्यीय जल संसाधन प्रबंधन के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकता है।

राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने का प्रयास


परियोजना के निर्माण और संचालन के लिए राजस्थान-हरियाणा यमुना वाटर एसपीवी का गठन किया जाएगा। इस योजना के तहत हथिनीकुंड बैराज से चूरू जिले के हंसियावास तक लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना का लाभ राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों के साथ-साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों को भी मिलेगा, जहां पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 34,102 करोड़ रुपये है। साथ ही इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने अथवा केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जाएंगे।

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