
टोल प्लाजा(फोटो-ANI)
NHAI Compensation: नागपुर जिला उपभोक्ता अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल वसूलने के बाद अच्छी और सुरक्षित सड़क उपलब्ध कराना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की जिम्मेदारी है। यदि सड़क पर गड्ढों के कारण किसी वाहन को नुकसान पहुंचता है, तो इसे सेवा में कमी (डिफिशिएंसी इन सर्विस) माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़कों की उचित मरम्मत सुनिश्चित किए बिना टोल वसूलना सेवा दोष की श्रेणी में आता है।
अदालत ने परिवादी(कम्प्लेन करने वाला) की शिकायत को स्वीकार करते हुए एनएचएआई को निर्देश दिया कि वह मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के मुआवजे के रूप में 10 हजार रुपये तथा मुकदमे के खर्च के तौर पर 5 हजार रुपये का भुगतान करे। इसके अलावा, परिवादी से वसूले गए 1,030 रुपये के टोल शुल्क की राशि भी लौटाने का आदेश दिया गया है। अदालत ने यह पूरी राशि 45 दिनों के भीतर अदा करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला वर्ष 2020 का है, जिस पर हाल ही में जिला उपभोक्ता अदालत ने अपना फैसला सुनाया। परिवादी ने शिकायत में बताया कि वह नागपुर से छिंदवाड़ा जा रहा था। यात्रा के दौरान उसने निर्धारित टोल शुल्क का भुगतान किया था, लेकिन खराब सड़क और गहरे गड्ढे के कारण उसकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। शिकायत के अनुसार, कार राजमार्ग पर बने गहरे गड्ढे में गिर गई, कार राजमार्ग पर बने गहरे गड्ढे में गिर गई, जिससे वाहन को गंभीर नुकसान पहुंचा और उसका एक टायर निकल गया। वाहन की मरम्मत में समय लगने के कारण परिवादी को एक दिन होटल में भी ठहरना पड़ा, जिससे उसे अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
परिवादी का यह भी आरोप था कि कि उसने घटना की शिकायत टोल प्लाजा पर दर्ज कराई थी, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही, एनएचएआई एनएचएआई को को भेजे गए नोटिस और क्षतिपूर्ति के दावे पर भी कोई जवाब या कार्रवाई नहीं हुई। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि एनएचएआई की ओर से सेवा में कमी रही और परिवादी मुआवजे का हकदार है।
Updated on:
30 Jun 2026 02:34 am
Published on:
30 Jun 2026 02:34 am
