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Solar Energy: कोयले से चलने वाले बिजलीघरों का धुआं सिर्फ हवा को प्रदूषित नहीं कर रहा, बल्कि सौर ऊर्जा प्लांटों की बिजली बनाने की क्षमता भी कम कर रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) की रिपोर्ट के अनुसार, कोल आधारित पावर प्लांटों से निकलने वाला धुआं और धूल के बेहद महीन कण सूरज की रोशनी को कमजोर कर देते हैं। इससे सोलर पैनलों तक कम धूप पहुंचती है और बिजली उत्पादन घट जाता है। इसकी वजह से सिर्फ उत्तर भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन को औसतन 20% तक नुकसान हो रहा है। पूरे देश में यह नुकसान करीब 9.6 % है।
रिपोर्ट के बाद दिल्ली-एनसीआर के आसपास चल रहे 13 कोयला आधारित पावर प्लांटों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस कारण इस क्षेत्र में ही सौर ऊर्जा उत्पादन में 17 फीसदी की कमी आई है। हाल ही में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने इनमें से कुछ बिजलीघरों पर प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन नहीं करने के कारण लाखों रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
2023 में प्रदूषण की वजह से दुनिया भर में सौर ऊर्जा उत्पादन 5.8% घट गया। इससे करीब 111 टेरावॉट-घंटे स्वच्छ बिजली का नुकसान हुआ, जो 18 मध्यम आकार के कोयला बिजलीघरों के एक साल के उत्पादन के बराबर है।
प्रदूषण से सौर ऊर्जा उत्पादन पर सबसे ज्यादा असर भारत में देखा गया। भारत में 9.6% की कमी दर्ज की गई। साल 2023 के आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार अगर प्रदूषण के स्तर को कम किया जाए, तो बिना नए सोलर पैनल लगाए भी स्वच्छ बिजली का उत्पादन बढ़ सकता है। इसके साथ ही कई और जानकारी सामने आई है।
सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की बात करें तो इसमें भारत,चीन, जापान,जर्मनी, अमेरिका और स्पेन शामिल है। निचे इस लिस्ट में देश और प्रतिशत दोनों दिया गया है। निचे लिस्ट देख लें।
| देश | सौर ऊर्जा उत्पादन में नुकसान |
|---|---|
| 🇮🇳 भारत | 9.6% |
| 🇨🇳 चीन | 7.9% |
| 🇯🇵 जापान | 5.4% |
| 🇩🇪 जर्मनी | 4.7% |
| 🇺🇸 अमेरिका | 3.1% |
| 🇪🇸 स्पेन | 3.1% |
Updated on:
30 Jun 2026, 4:37 AM IST
Published on:
30 Jun 2026, 4:37 AM IST
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