
ट्रंप टैरिफ में भारतीय को नहीं मिली छूट, photo source@AI
India US Trade Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इम्पोर्ट किए जाने वाले ड्रोन और एयरक्राफ्ट के पार्ट्स पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। घोषित नए ड्रोन टैरिफ (Drone Tariffs) में भारतीय ड्रोन निर्माताओं को कोई विशेष छूट या रियायती श्रेणी नहीं मिली है, जिसके कारण भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले मानवरहित विमान और उपकरण मानक उच्च शुल्क के दायरे में आएंगे।
इस फैसले के तहत थर्मल कैमरे वाले ड्रोन, 25 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले ड्रोन और 25 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले एयरक्राफ्ट के पार्ट्स पर 100% टैरिफ लगाया गया है। 250 ग्राम से कम वजन वाले छोटे कंज्यूमर ड्रोन पर 25% इम्पोर्ट टैरिफ लगेगा। कुछ छूट के तहत EU, जापान, साउथ कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और ताइवान के लिए टैरिफ दरें 15% और UK के लिए 10% कर दी गई हैं। अमेरिकी आदेश में एक 'ऑनशोरिंग प्रोग्राम' भी है, जिसके तहत यदि कंपनियां अमेरिकी धरती पर विनिर्माण इकाई स्थापित करती हैं, तो निर्माण के दौरान उन्हें इन शुल्कों से छूट मिल सकती है।
भारतीय ड्रोन बनाने वाली कंपनियों को अमेरिका की उस खास टैरिफ व्यवस्था से बाहर रखा गया है, जिसके तहत चुने हुए साझेदारों को कम दरें मिलती हैं। इससे भारत में बने बिना पायलट वाले विमानों (unmanned aircraft) और उनके पुर्जों पर 100 प्रतिशत तक का शुल्क लग सकता है।
इस रियायती सूची में भारत का नाम नहीं है और न ही भारत के लिए कोई खास टैरिफ लगाया गया है। हालांकि, भारत उस समूह में शामिल नहीं है, जिसके योग्य उत्पादों को कम दरें मिलेंगी। भारत को कोई रियायती छूट न मिलने के बावजूद, अमेरिकी प्रशासन के इस कदम का मुख्य निशाना चीनी ड्रोन बाजार (जैसे DJI) और उसकी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर नकेल कसना है।
कुछ अतिरिक्त ड्रोन पुर्जों पर 9 फरवरी, 2027 से 25 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। इसे देर से लागू करने का मकसद घरेलू उत्पादन को बढ़ने का समय देना है। ये शुल्क आम तौर पर अन्य लागू टैरिफ, करों, फीस और शुल्कों के अलावा लगाए जाएंगे। युद्ध विभाग और फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन की मंजूरशुदा सूची में शामिल उत्पादों को 180 दिन की मोहलत मिलेगी। वाणिज्य सचिव टैरिफ व्यवस्था में और पुर्जे भी शामिल कर सकते हैं, अगर उनके आयात से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो या नए उपायों पर असर पड़े।
यह घोषणा उन भारतीय कंपनियों के लिए एक और रास्ता खोलती है, जो अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग में निवेश करने को तैयार हैं। यह उन कंपनियों के लिए 'ऑनशोरिंग' प्रोग्राम को मंजूरी देती है, जो अमेरिकी फैसिलिटीज (कारखानों या केंद्रों) का निर्माण, नवीनीकरण या विस्तार कर रही हैं।
Updated on:
14 Aug 2026 05:11 pm
Published on:
14 Aug 2026 05:11 pm
