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CBSE की तीन भाषा नीति को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर सुनवाई के लिए सहमति दी

CBSE Rule Change: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली PIL पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है।
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May 23, 2026
CBSE three language policy in Supreme Court.
सुप्रीम कोर्ट (Photo- IANS)

CBSE three Language Policy: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को NC, चेन्नई के अभिभावकों और शिक्षकों की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसमें CBSE की हालिया नीति को चुनौती दी गई है। इस नीति के तहत कक्षा 9 के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस नीति से भ्रम की स्थिति पैदा होगी।

जल्द सुनवाई की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने CJI सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ को बताया कि अचानक कक्षा 9 के छात्रों पर दो अतिरिक्त भाषाएं अनिवार्य कर दी गई हैं, जबकि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी को बाधित करेगी और छात्रों पर अनुचित बोझ डालती है। उन्होंने कहा, 'छात्र इस स्थिति में कैसे पढ़ाई कर पाएंगे और भाषा परीक्षा कैसे देंगे? इससे छात्रों और शिक्षकों के बीच भारी भ्रम और अव्यवस्था पैदा होगी।

याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आश्वासन दिया कि वह इस याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई करेगी। यह याचिका 17 अभिभावकों और दो शिक्षकों द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है, जिनके बच्चे दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और चेन्नई के CBSE से संबद्ध स्कूलों में पढ़ते हैं। यह याचिका अधिवक्ता श्रद्धा देशमुख के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि नई नीति CBSE की 9 अप्रैल की अधिसूचना के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि शैक्षणिक सत्र 2029-30 तक कक्षा 9 में तीसरी भाषा लागू नहीं होगी।

याचिका में क्या कहा गया है

याचिका में कहा गया है कि 15 मई को, 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ होने और भाषा आवंटन तथा समय सारिणी को अंतिम रूप दिए जाने के बाद तीन भाषा नीति कक्षा 9 के हजारों छात्रों को अपूरणीय नुकसान पहुंचाएगा। साथ ही विदेशी भाषाओं को पढ़ाने में निपुण कई शिक्षकों की आजीविका छीन लेगा, क्योंकि उन्हें क्षेत्रीय भाषाओं को पढ़ाने में सक्षम शिक्षकों के लिए जगह बनानी होगी।

याचिका में यह भी कहा गया है कि छात्रों और शिक्षकों की समस्याएं तब और बढ़ गईं जब पाठ्य-पुस्तकें और शिक्षण सामग्री उपलब्ध नहीं हैं। CBSE छात्रों को कक्षा 6 की पुस्तकों से दूसरी भारतीय भाषा के मूलभूत ज्ञान सीखने के लिए कहकर तदर्थ व्यवस्था कर रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बिना पाठ्यपुस्तकों, प्रशिक्षित शिक्षकों और मूल्यांकन ढांचे के किसी विषय को अनिवार्य बनाना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक उल्लंघन है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि CBSE को शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता करने से रोका जाए।

Updated on:
27 May 2026 02:55 pm
Published on:
23 May 2026 05:45 am