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CEC विवाद: महाभियोग नोटिस खारिज होने के बाद अब क्या करेगा विपक्ष? सामने आए बड़े विकल्प

CEC Gyanesh Kumar impeachment notice: राज्यसभा में विपक्ष के 63 सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे, वहीं लोकसभा में दिए नोटिस पर 130 सांसदों के हस्ताक्षर थे।
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Updated: 7 Apr 2026, 2:59 PM IST
CEC Gyanesh Kumar (Photo-IANS)
CEC Gyanesh Kumar (Photo-IANS)

Gyanesh Kumar Impeachment Row: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी विधानसभा चुनाव के बीच विपक्ष को बड़ा झटका लगा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए दिया गया विपक्ष का 'महाभियोग' नोटिस को राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार करने से इनकार करते हुए खारिज कर दिया है।

नोटिस खारिज करने के बारे में राज्यसभा और लोकसभा सचिवालय ने सोमवार को बाकायदा अलग-अलग बुलेटिन जारी कर इसकी सूचना दी। नोटिस खारिज होने से इस मामले में कोई प्रक्रिया अब आगे नहीं बढ़ेगी।

12 मार्च को दिया था नोटिस

दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टीएमसी की पहल पर कांग्रेस, सपा, डीएमके, आप समेत अन्य विपक्षी दलों ने सात आरोप लगाते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए राज्यसभा और लोकसभा में 12 मार्च को एक साथ नोटिस दिया था।

जहां राज्यसभा में विपक्ष के 63 सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे, वहीं लोकसभा में दिए नोटिस पर 130 सांसदों के हस्ताक्षर थे। राज्यसभा के सभापति राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर बिरला ने नोटिस और इससे जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की। दोनों सदनों की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया कि सभी प्रासंगिक पहलुओं और संबंधित मुद्दों का सावधानीपूर्वक और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने के बाद इसे स्वीकार करने और आगे बढ़ाने योग्य नहीं माना गया।

विपक्ष ने लगाए थे कई आरोप

विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण, सिद्ध कदाचार, चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

कांग्रेस-टीएमसी ने की आलोचना

नोटिस अस्वीकार किए जाने के फैसले की कांग्रेस व टीएमसी ने आलोचना की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने राज्यसभा के बुलेटिन को एक्स पोस्ट पर साझा करते हुए कहा कि हम जानते हैं कि राज्यसभा के पिछले चेयरमैन के साथ क्या हुआ था, जिन्होंने विपक्षी सांसदों की याचिका स्वीकार कर ली थी।

टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि बिना कारण बताए नोटिस खारिज किया गया, भाजपा हमारी संसद का मजाक उड़ाती है जो शर्मनाक है। भाजपा ने इस मामले में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

विपक्ष अब क्या कर सकता है?

प्रस्ताव खारिज होने के बाद विपक्ष के पास सीमित विकल्प हैं। विपक्ष इस मामले में राज्यसभा सभापति व लोकसभा स्पीकर के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। कांग्रेस ने 2018 में देश के तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस खारिज किए जाने को कोर्ट में चुनौती दी थी।

Updated on:
7 Apr 2026, 2:59 PM IST
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