
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री (Photo: IANS)
अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) को 2018 में दी गई छूट वापस ले ली है। अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट की सीमा जल्द ही समाप्त होने वाली है। चाबहार बंदरगाह पर छूट बढ़ाने के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा है। भारत की इस बंदरगाह पर छूट बढ़ाने के लिए अमरीका और ईरान से बातचीत जारी है।
भारत अपना रणनीतिक निवेश चाबहार पोर्ट बचाने के लिए अमेरिका और ईरान दोनों देशों के साथ सक्रिय कूटनीतिक वार्ता कर रहा है। अक्टूबर 2025 में अमेरिका ने भारत को इस ईरानी बंदरगाह के संचालन के लिए 6 महीने की सैंक्शंस छूट दी थी, जो इस महीने के अंत (26 अप्रैल 2026) तक समाप्त होने वाली है। सूत्रों के अनुसार, भारत डोनाल्ड ट्रंप सरकार से इस छूट को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहा है।
भारत, ईरान की एक स्थानीय संस्था के माध्यम से बंदरगाह के संचालन का वैकल्पिक प्लान भी तैयार कर रहा है। इस योजना में एक कानूनी प्रावधान शामिल किया जाएगा। जिसके तहत जैसे ही अमेरिकी प्रतिबंध हटेंगे, चाबहार का संचालन और नियंत्रण तुरंत भारत के पास वापस आ जाएगा। यह कदम भारत के दीर्घकालिक हितों की रक्षा के लिए उठाया जा रहा है। बता दें कि वर्ष 2024 में भारत और ईरान के बीच 10 वर्ष का महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित चाबहार पोर्ट का संचालन भारत को सौंपा गया।
चाबहार बंदरगाह अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक भारत की पहुंच के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर पाकिस्तान को बायपास करते हुए। यह बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से मात्र 170 किलोमीटर दूर है। इसलिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गठजोड़ के खिलाफ भारत के लिए एक मजबूत रणनीतिक जवाब और हिंद महासागर में काउंटर बैलेंस के रूप में काम करता है।
चाबहार बंदरगाह ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित भारत की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक परियोजना है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए सीधे अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरेशिया तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे एक नया व्यापारिक मार्ग खुलता है।
चाबहार इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का प्रमुख हिस्सा है। INSTC कॉरिडोर के रास्ते से समय और लागत में बचत होगी है। भारत इस बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान को मानवीय सहायता और आवश्यक सामान की निर्बाध आपूर्ति कर सकता है। चाबहार भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करता है, क्योंकि यह ईरान से तेल और गैस आयात के लिए एक सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराता है।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री 8 से 10 अप्रैल तक अमेरिका के दौरे पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह यात्रा भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा करने और व्यापार, रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच मिस्री की यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि अमेरिका दौरे के समय विदेश सचिव चाबहार पोर्ट पर सैंक्शंस छूट बढ़ाने के मुद्दे पर बात कर सकते हैं। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी हाल ही में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा से मुलाकात कर चुके हैं।
Updated on:
08 Apr 2026 02:10 am
Published on:
08 Apr 2026 02:10 am
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