
अमेरिका व ईरान में युद्धविराम। ( फोटो: ANI)
Middle East Tensions: के बीच एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर सैन्य हमले रोकने और दो सप्ताह के सीजफायर का ऐलान करने के बाद, ईरान में जश्न का माहौल है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अमेरिका के इस कदम को अपनी "ऐतिहासिक जीत" करार दिया है। लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच इस सीजफायर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
ईरान के सरकारी मीडिया और सुरक्षा परिषद के अनुसार, ईरान ने अपने युद्ध के लगभग सभी उद्देश्य पूरे कर लिए हैं। परिषद ने दावा किया कि उन्होंने अमेरिका को उनकी 10 सूत्रीय योजना मानने के लिए मजबूर कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर उनके नियंत्रण, प्रतिबंधों को हटाने और अपनी सेना को पीछे बुलाने की बात स्वीकार कर ली है। ईरान के मुताबिक, उनके "वीर जवानों ने दुश्मन को ऐतिहासिक रूप से असहाय कर दिया है।"
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने अपने सभी बड़े सैन्य लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिए हैं। ट्रंप ने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के विशेष अनुरोध पर उन्होंने यह विनाशकारी हमला टाला है। इसके बदले में ईरान को तुरंत और सुरक्षित रूप से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को खोलना होगा। ट्रंप ने ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव को स्थायी शांति वार्ता के लिए एक अच्छा आधार माना है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी इस युद्धविराम की पुष्टि की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि अगर ईरान पर हमले रुके रहेंगे, तो उनकी सेना भी रक्षात्मक अभियान रोक देगी। उन्होंने इस विवाद को शांत करने में अहम भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख का विशेष आभार भी जताया। अराघची ने भरोसा दिया कि अगले दो सप्ताह तक होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाएगा।
इस युद्धविराम के फैसले पर वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। शेयर और क्रूड ऑयल मार्केट में स्थिरता देखने को मिल रही है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के सुरक्षित खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। अब पूरी दुनिया की नजरें अगले दो हफ्तों पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान और अमेरिका इस 10 सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर किसी स्थायी शांति समझौते तक पहुँच पाएंगे? अगर दोनों देश सहमत नहीं हुए, तो क्या 14 दिन बाद खाड़ी क्षेत्र में फिर से युद्ध के बादल मंडराने लगेंगे? इस पूरी घटना में पाकिस्तान का 'पीस मेकर' (शांतिदूत) के रूप में उभरना एक नया कूटनीतिक एंगल है। मध्य पूर्व के इतने बड़े और संवेदनशील मुद्दे में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की मध्यस्थता को पाकिस्तान की विदेश नीति की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
(इनपुट : ANI)
Published on:
08 Apr 2026 07:24 am
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