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अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर पर इजरायल ने कह दी बड़ी बात: ‘ईरान की शर्तों पर नहीं हुआ समझौता’

US Iran Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए ईरान के साथ दो हफ्ते के सीजपफायर का ऐलान किया है। इस पर इजरायल ने साफ किया है कि यह सीजफायर ईरान की शर्तों पर नहीं हुआ है और खतरा अभी टला नहीं है।

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भारत

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MI Zahir

Apr 08, 2026

Benjamin Netanyahu

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। (इमेज सोर्स: ANI)

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव और युद्ध के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित विनाशकारी हमलों को रोकते हुए दो सप्ताह के सीजफायर का ऐलान किया है। इस कूटनीतिक प्रगति के तुरंत बाद, इजरायल ने इस समझौते पर सहमति तो जताई है, लेकिन एक बेहद कड़ी प्रतिक्रिया भी दी है। इजरायल ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि यह सीजफायर किसी भी सूरत में 'ईरान की शर्तों पर' नहीं हुआ है।

ट्रंप का अल्टीमेटम और सीजफायर की शर्तें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी 8 बजे की डेडलाइन खत्म होने से ठीक दो घंटे पहले इस संघर्ष विराम की घोषणा की। इससे पहले उन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचों, पावर प्लांट और पुलों को तबाह करने की चेतावनी दी थी। ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह सीजफायर पूरी तरह से एक बड़ी शर्त पर आधारित है-ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को "पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से" खोलना होगा।

शहबाज शरीफ की मध्यस्थता की भी अहम भूमिका रही

वैश्विक तेल व्यापार के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य एक जीवन रेखा है। इस सीजफायर को अमलीजामा पहनाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मध्यस्थता की भी अहम भूमिका रही, जिनके अनुरोध पर कूटनीतिक बातचीत के लिए यह दो सप्ताह का समय निकाला गया है।

इजराइल की 'बड़ी बात' और कड़ा रुख

अमेरिका के इस फैसले के बाद इजरायल ने भी अपने सैन्य अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। हालांकि, इजराइल ने स्थिति को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। इजरायली कूटनीतिक हलकों और अधिकारियों के हवाले से यह साफ कर दिया गया है।

ईरान की शर्तें खारिज: ईरान ने एक 10-सूत्री प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें सभी प्रतिबंधों को हटाने, अमेरिकी बैंकों में फ्रीज किए गए फंड्स को जारी करने, और युद्ध को स्थायी रूप से बिना किसी शर्त के खत्म करने जैसी बातें शामिल थीं। इजराइल ने स्पष्ट किया है कि सीजफायर इन मनमानी शर्तों को मानकर नहीं किया गया है।

केवल होर्मुज पर फोकस: इजरायल का स्पष्ट मानना है कि यह रोक सिर्फ इसलिए है क्योंकि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से नाकेबंदी हटाने का अपना लक्ष्य मनवा लिया है। जैसे ही ईरान इस जलमार्ग पर कोई भी अड़चन पैदा करेगा, सीजफायर टूट जाएगा।

दबाव की जीत: इजरायल इसे अपनी और अमेरिका की सैन्य शक्ति की जीत मान रहा है, जिसके खौफ ने ईरान को बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर दिया।

ईरान का रुख और भविष्य की रणनीति

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने सीजफायर को स्वीकार कर लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इन दो हफ्तों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा, लेकिन यह ईरान के सशस्त्र बलों के 'समन्वय' से होगा। ईरान इसे अपनी कूटनीतिक जीत और अपने 10-सूत्री शांति प्रस्ताव की शुरुआत के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहा है, जबकि वह अभी भी यह कह रहा है कि "हमारी उंगली ट्रिगर पर है।"

इस मामले में अब आगे क्या होगा ?

आने वाले दो सप्ताह मध्य पूर्व के भविष्य के लिए बेहद अहम होंगे। इस दौरान इस्लामाबाद में आगे की कूटनीतिक बातचीत होने की उम्मीद है। हालांकि, इजरायल और अमेरिका दोनों की नज़रें ईरान की हर सैन्य गतिविधि पर पैनी बनी हुई हैं। इजरायल ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने इस समय का इस्तेमाल अपनी परमाणु या बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को फिर से संगठित करने के लिए किया, तो इजरायली सेना बिना किसी हिचकिचाहट के दोबारा बड़े हमले शुरू कर देगी। यह संघर्ष विराम फिलहाल एक रणनीतिक ठहराव है, कोई स्थायी शांति समझौता नहीं।