
Chambal Sand Mining: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में जारी अवैध रेत खनन पर राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकारों को कड़े निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि पर्यावरणीय शासन केवल अदालत के हस्तक्षेप या व्यक्तिगत जवाबदेही के डर तक सीमित नहीं रह सकता। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21, 48ए और 51ए(जी) राज्य और उसकी एजेंसियों पर यह सतत दायित्व डालते हैं कि वे पर्यावरणीय क्षति का पूर्वानुमान लगाएं, उसे रोकें और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करें।
अदालत ने राज्यों और एनएचएआई ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामों की समीक्षा के दौरान माना कि पिछली सुनवाई के मुकाबले प्रशासनिक समन्वय बेहतर हुआ है, लेकिन अवैध खनन और परिवहन में लगे बिना पंजीकरण व बिना पहचान वाले वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखी। कोर्ट ने कहा कि हलफनामों में ठोस प्रवर्तन ढांचे का भी अभाव है। सुनवाई के दौरान मीडिया रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए अदालत ने संकेत दिया कि यदि अवैध खनन अब भी जारी है तो अधिकारियों के हलफनामों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीनों राज्यों को वन विभाग में रिक्त पड़े फॉरेस्ट गार्ड और अन्य फ्रंटलाइन पदों को भरने के निर्देश दिए। अदालत ने सीसीटीवी नेटवर्क, कंट्रोल सेंटर, एकीकृत मॉनिटरिंग सिस्टम और तकनीकी निगरानी ढांचा तत्काल स्थापित करने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी प्रमुख निगरानी और सर्विलांस उपाय 'युद्धस्तर' पर लागू किए जाएं और छह माह के भीतर उनका क्रियान्वयन पूरा हो।
अदालत ने राज्यों को अवैध खनन और परिवहन में लगे वाहनों, मशीनों और फर्जी नंबर प्लेट वाले ट्रकों को तुरंत जब्त करने के आदेश दिए। साथ ही केवल चालकों ही नहीं, बल्कि मालिकों, फाइनेंसरों, ऑपरेटरों, ठेकेदारों और पूरे अवैध नेटवर्क पर आपराधिक कार्रवाई करने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी एफआइआर की व्यापक जांच हो, आर्थिक लाभ लेने वालों की पहचान की जाए तथा जब्ती, स्वामित्व, पुराने उल्लंघनों और आपराधिक रिकॉर्ड का डिजिटल डाटा सुरक्षित रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आर्थिक मजबूरियां भी लोगों को अवैध खनन की ओर धकेलती हैं। इसलिए अदालत ने स्थानीय युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को रोजगार में प्राथमिकता देने, कौशल विकास कार्यक्रम चलाने तथा उन्हें संरक्षण, वनीकरण, ईको-टूरिज्म, ईको-रिस्टोरेशन और निगरानी गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए। करीब 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य घड़ियाल, लाल मुकुट कछुआ और गंगा डॉल्फिन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों का प्रमुख आवास है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पिछली सुनवाई में दिए गए निर्देशों और अनुपालन की स्थिति का भी जिक्र किया।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और संकटग्रस्त जलीय जीवों पर मंडरा रहे खतरे से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के रवैये पर 'गंभीर असंतोष' जताया। अदालत ने कहा कि 2 अप्रेल और 17 अप्रेल 2026 के आदेशों के अनुपालन में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया बेहद 'सुस्त और निराशाजनक' दिखाई देती है।