
Delhi Gymkhana Club Case (AI Image)
Delhi Gymkhana Club Case: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में भरोसा दिलाया है कि दिल्ली जिमखाना क्लब को जबरदस्ती नहीं खाली कराया जाएगा। अगर क्लब 5 जून तक परिसर खाली नहीं करता है, तो सरकार कानून के अनुसार उचित प्रक्रिया अपनाएगी। पुलिस तुरंत अंदर घुसकर कब्जा नहीं करेगी।
सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि 5 जून की डेडलाइन क्लब को अपनी मर्जी से जगह खाली करने का मौका देने के लिए दी गई थी। उन्होंने कहा कि कोई भी कार्रवाई सार्वजनिक बेदखली के कानूनी प्रावधानों के तहत ही होगी। कोर्ट ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर ले लिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने क्लब के सदस्यों से कहा कि जमीन चले जाने के बाद भी उनकी सदस्यता बनी रहेगी क्योंकि वे पट्टेदार नहीं हैं। सरकार ने अल्टरनेटिव जगह देने का भी आश्वासन दिया।
ज्ञात है कि केंद्र सरकार ने केंद्र सरकार ने लीज़ शर्तों (1928 लीज़) का हवाला देते हुए 22 मई को जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन (2, सफदरजंग रोड) को रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक सिक्योरिटी के लिए 5 जून 2026 तक खाली करने का नोटिस दिया था। क्लब ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
औपनिवेशिक काल में इस क्लब की स्थापना जुलाई 1913 में हुई, जब ब्रिटिश भारतीय सरकार ने 1911 में राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। फरवरी 1928 में सरकार द्वारा लुटियंस दिल्ली के साउथ एवेन्यू-सफदरजंग रोड पर यह भूमि इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब को पट्टे पर दी गई थी, जिसके बाद 1930 के दशक में इमारतों का निर्माण किया गया था। करीब 113 साल पुराना प्रतिष्ठित क्लब 27.3 एकड़ सरकारी जमीन पर बना है, जो ब्रिटिश काल में अंग्रेज अधिकारियों और खेल प्रेमियों के लिए बनाया गया था। यहां टेनिस, स्विमिंग पूल, स्क्वैश, बिलियर्ड्स जैसी कई सुविधाएं हैं।
देश की आजादी के बाद यह क्लब दिल्ली की नौकरशाही, राजनीतिज्ञों, सेना के अधिकारियों और एलीट वर्ग का पसंदीदा ठिकाना बन गया। क्लब की मेंबरशिप बहुत मुश्किल और महंगी है, लंबी वेटिंग लिस्ट चलती है। लगभग 14 हजार सदस्य है। जिनमें लगभग पांच हजार स्थायी सदस्य है। क्लब पर लंबे समय से वित्तीय गड़बड़ियां, अनियमित मेंबरशिप, नियमों का उल्लंघन जैसे आरोप लगते रहे। पूर्व बोर्ड सदस्यों ने भी भ्रष्टाचार की शिकायतें कीं।
क्लब को खाली कराने का सरकार का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा बुनियादी ढांचा है। क्लब प्रधानमंत्री आवास के बिल्कुल पास है। यह हाई-सिक्योरिटी जोन है। जमीन को सरकारी व रक्षा उपयोग में लाने के लिए लीज़ का पब्लिक पर्पज क्लॉज लागू किया गया।
सरकार की ओर से जगह खाली करने के नोटिस के बाद जिमखाना क्लब प्रबंधन वैकल्पिक जमीन की मांग कर रहा है और कह रहा है कि यदि 113 साल पुराना क्लब बंद होगा तो सैंकड़ों कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित होंगी। क्लब की ओर से मामला कोर्ट में ले जाया चुका है, इसलिए अब अंतिम फैसला कोर्ट करेगा।
विपक्षी दलों से जुड़े नेताओं ने इस मामले को राजनीति का रंग दिया हैं। क्लब से जुड़े एलीट वर्ग के सदस्यों की भावना को भुनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं कई पूर्व नौकरशाह और सदस्य क्लब को खाली करने के आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं। कुछ इसे एलीट वर्ग के विशेषाधिकारों का अंत मान रहे हैं। यह ऐतिहासिक विरासत बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित का मुद्दा बन गया है।
Published on:
27 May 2026 01:20 am
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