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‘चिकन नेक’ पर रेलवे का बड़ा प्लान, ठाकुरगंज-न्यू जलपाईगुड़ी के बीच बनेगा नया रेल मार्ग

Northeast Connectivity: केंद्र सरकार ने रणनीतिक रूप से अहम 'चिकन नेक' कॉरिडोर से होकर गुजरने वाली चौथी रेल लाइन को मंजूरी दे दी है।
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Aug 13, 2026
Northeast Frontier Railway
'चिकन नेक' कॉरिडोर से चौथी रेल लाइन को मंजूरी, photo source@AI

Chicken Neck Corridor: केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी 'चिकन नेक' क्षेत्र में चौथी रेल लाइन और नए रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके तहत ठाकुरगंज-चतरहाट नई ब्रॉडगेज लाइन (लगभग 24.40 किमी) और वैकल्पिक सुरक्षित रेल मार्गों का काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

'चिकन नेक' का रणनीतिक महत्व

'चिकन नेक' (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) भारत का एकमात्र संकीर्ण भू-भाग है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और सुचारू आवागमन के लिहाज से यह चौथी लाइन बेहद अहम है। चिकेन नेक, जिसे सिलीगुड़ी कारिडोर के नाम से भी जाना जाता है, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे महत्वपूर्ण स्थलीय संपर्क मार्ग है। लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा यह गलियारा नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और चीन (तिब्बत) की सीमाओं के निकट स्थित है। इस परियोजना के तहत लगभग 24.40 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) और सॉयल टेस्टिंग का काम शुरू हो चुका है।

ठाकुरगंज-न्यू जलपाईगुड़ी के बीच बिछेगी पटरी

प्रोजेक्ट में नई रेल लाइन के निर्माण के साथ ही चिकन नेक क्षेत्र में चौथा रेल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। अभी इस क्षेत्र में तीन प्रमुख रेल मार्ग हैं, जिनमें कटिहार–किशनगंज–अलुआबाड़ी रोड–चतरहाट– न्यू जलपाईगुड़ी, कटिहार–किशनगंज–अलुआबाड़ी रोड–ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी तथा कटिहार–अररिया–ठाकुरगंज–गलगलिया–सिलीगुड़ी रेल मार्ग संचालित हैं।

प्रस्तावित रेल लाइन ठाकुरगंज को सीधे न्यू जलपाईगुड़ी मुख्य रेल मार्ग से जोड़ेगी, जिससे रेल परिचालन की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा तथा मौजूदा रेल लाइनों पर दबाव कम होगा।

वैकल्पिक मार्गों पर भी विचार

इससे बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा तथा पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) क्षेत्र में ट्रेनों की आवाजाही का दबाव कम होगा। इस संकीर्ण और संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भूमिगत (Underground) रेलवे ट्रैक और वैकल्पिक मार्गों के विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है, ताकि पूर्वोत्तर की लाइफलाइन हमेशा सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) में रेल पटरियों के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण (Electrification) का कार्य पूरा कर लिया गया है। पिछले एक वर्ष के भीतर एनएफ रेलवे में 42 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं और विभिन्न स्टेशनों पर 250 नए ठहराव (Stoppages) दिए गए हैं।

Updated on:
13 Aug 2026 04:28 pm
Published on:
13 Aug 2026 03:43 pm
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