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Patrika Explain: चीनी आक्रमकता को लेकर क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट? पहले डोकलाम, फिर गलवान और अब अरुणाचल में तनाव

अरुणाचल के ऊपरी सुबनसिरी में जुलाई से भारत-चीन सेनाओं का फेस-ऑफ जारी है। जानें विदेश मंत्रालय, कांग्रेस और एक्सपर्ट्स की राय और चीन का दावा।
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Updated: 24 Oct 2026, 8:49 AM IST
India-China Border Tension ITBP
इंडिया-चीन बॉर्डर पर ITBP जवान (फ़ोटो- ANI)

Chinese incursions in Arunachal Pradesh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब SCO की बैठक में भाग लेने के लिए चीन पहुंचे तब माना जा रहा था कि गलवान झड़प (2020) के कारण जमी बर्फ पिघलने लगी है। वहीं, इसी साल जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे तो इसके मायने निकाले जाने लगे कि हाथी और ड्रैगन की दोस्ती फिर से बहाल होने में कुछ ही समय बाकी रह गए हैं, लेकिन अरुणाचल में चीनी घुसपैठ की खबर ने एकबार फिर सबको चौंका दिया है।

कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद?

बीते दिनों खबर सामने आई कि अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्सिंग सर्कल में माजा कंपनी ऑपरेटिंग बेस के पास असाफिला इलाके में जुलाई के आखिर से भारत और चीन के बीच फेस-ऑफ की स्थिति बनी हुई है। जुलाई में नियमित गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच थोड़ी झड़प हुई थी। इसके कुछ ही समय बाद चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) बड़ी संख्या में वापस लौटी और ऊंचे पहाड़ी इलाके में तंबू गाड़ दिए। यह जगह उस सीमा रेखा के 6 से 7 किलोमीटर अंदर है, जिसे भारत अपनी सीमा का हिस्सा मानता है। तब से कॉर्प्स कमांडर और राजनयिक स्तर पर कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन सीमा पर तनाव अभी भी बना हुआ है। भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने सीमा पर अपनी तैनाती काफी बढ़ा दी है।

चीनी गश्ती को लेकर भारत विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

चीन के इस कदम को लेकर शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लंबित मुद्दों को सुलझाने व गलतफहमी और गलत अनुमान से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का उपयोग करना जारी रखे हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि चीनी सेना द्वारा निर्धारित गश्ती पैटर्न से हटकर गश्त करने पर भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में स्थिति बिगड़ जाती है।

लद्दाख को लेकर चीन की बयानबाजी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

रणधीर जायसवाल ने कहा कि दोनों पक्ष बेहतर सीमा प्रबंधन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा की बेहतर समझ विकसित करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा, 'मैं यह भी दोहराना चाहूंगा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।' वहीं, बीते सप्ताह जब भारत सरकार ने लद्दाख के 28 स्थानों को मानक स्थान और विशेषता नामों से चिह्नित किया था, तब उस पर चीन की तरफ से बयानबाजी हुई थी। इस पर भारत ने कहा कि लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है और बना रहेगा।

चीन संग रिश्तों पर क्या बोले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ?

सितंबर महीने में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क दौरे के दौरान चीन के साथ सीमा विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के संबंध सुधरे हैं, लेकिन सीमा की स्थिति ही यह निर्धारित करेगी कि दोनों देश संबंधों को किस हद तक सामान्य बना सकते हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत-चीन संबंध 2025 की तुलना में बेहतर हैं, और 2024 की तुलना में तो और भी बेहतर हैं।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चीनी घुसपैठ पर क्या बोला?

चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर कांग्रेस ने भी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता व राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब आईटीबीपी के महानिदेशक अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए के साथ हालिया आमने-सामने की मुठभेड़ों में बल के प्रदर्शन की सराहना कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप क्यों है?

कांग्रेस नेता यही नहीं रुके। उन्होंने डोकलाम, गलवान और पुराने विवादों का जिक्र किया। रमेश ने कहा कि 19 जून 2020 की उस घटना का भी जिक्र किया जब गलवान घाटी में 20 जवानों के बलिदान के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था कि न कोई हमारी सीमा में घुसा है और न ही कोई पोस्ट कब्जे में है। सेवानिवृत्त सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने भी बताया था कि लद्दाख में घुसपैठ के समय उन्हें सिर्फ यही निर्देश मिला था‘जो उचित समझो वो करो’। उन्होंने कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल 99 अरब डॉलर था। चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बना रहा है। इसके कारण पूरे पूर्वोत्तर भारत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

Brahma Chellaney on China's strategy: चीनी आक्रमकता को लेकर क्या कह रहे हैं सामरिक मामलों के जानकार ?

भारत के सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने चीन के मुद्दे पर एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत के उत्थान को रोकने के लिए चीन की दोहरी रणनीति अपना रहा है। वह एक तरफ क्षेत्रीय दबाव बना रहा है। दूसरी तरफ आर्थिक दबाव बनाकर वह भारत को घेरने की कोशिश करता रहता है।

चेलानी ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) को चुपचाप बदलने के बाद, अब चीन भारत-तिब्बत सीमा के एक और हिस्से, यानी अरुणाचल प्रदेश में भी जमीनी हालात बदलने की कोशिश कर रहा है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के नेतृत्व ने पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्रों में कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना जारी है। यह गतिरोध जुलाई में तब शुरू हुआ, जब चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों को तक्सिंग इलाके में गश्त पर लौटने से रोक दिया, जिसके कारण अन्य जगहों पर भी टकराव की स्थिति पैदा हो गई।

हाल के महीनों में, चीन ने भारत के लिए विशेष रूप से निर्यात प्रतिबंध भी लागू किए हैं। इसे भारत के एक वैकल्पिक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने की गति को धीमा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ग्लोबल सप्लाई चेन पर अपने दबदबे का फायदा उठाते हुए, बीजिंग ने भारत को होने वाले निर्यात पर रोक लगा दी है। इसमें विनिर्माण उपकरण, औद्योगिक पुर्जे, बैटरी तकनीक, लिथियम-आयन से जुड़ी सामग्री और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।

अरुणाचल प्रदेश को लेकर क्या रहा है चीन का रुख?

चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत या जंगनान कहकर अपना हिस्सा बताता है। उसका दावा है कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से तिब्बत से जुड़ा रहा है। चीन 1914 की शिमला संधि से खींची गई मैकमोहन रेखा को अवैध मानता है, क्योंकि तब तिब्बत के प्रतिनिधि शामिल थे और चीन ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। लगभग 90,000 वर्ग किमी क्षेत्र पर वह दावा जताता है। चीन समय-समय पर अरुणाचल के स्थानों के नए नाम जारी करता है और भारतीय नेताओं के दौरों पर आपत्ति जताता है। भारत इसे अपना अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताकर दावे को पूरी तरह खारिज करता है।

Updated on:
24 Oct 2026, 8:49 AM IST
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