
Cockroach Janta Party Protest: पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की पेशकश की है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के दरवाजे खुले हैं और छात्र जहां चाहेंगे, हम वहां चर्चा के लिए तैयार हैं। बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल रहेंगे। गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को बातचीत के लिए अब तक चार बार न्योता भेजा है लेकिन उनकी तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार सभी छात्रों और युवाओं से बातचीत करना चाहती है। उन्होंने कहा यह सभी युवा साथियों के लिए खुला निमंत्रण है। सरकार हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार है। हम अपनी प्रतिष्ठा को बीच में नहीं आने देंगे। उन्होंने बताया कि बातचीत में वह खुद और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद रहेंगे। उनके मुताबिक, बातचीत के जरिए ही इस मामले का हल निकाला जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्र जहां चाहेंगे सरकार वहीं बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी चाहें तो जेपी नड्डा के आवास पर आ सकते हैं या सरकार के किसी अन्य कार्यालय में भी चर्चा हो सकती है। उन्होंने एक बार फिर कहा कि सरकार बुधवार दोपहर से अब तक चार बार बातचीत का प्रस्ताव भेज चुकी है और अब भी छात्रों के जवाब का इंतजार कर रही है।
इस बीच जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों का प्रदर्शन 31वें दिन भी जारी है। प्रदर्शनकारी नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इससे पहले प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल जेपी नड्डा के आवास पहुंचा था। वहां उन्होंने अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई की मांग की।
दूसरी तरफ सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उन्हें तेज बुखार और शरीर में दर्द है। उन्होंने कहा कि वह पिछले कुछ दिनों से दर्द की दवा लेकर प्रदर्शन में शामिल हो रहे थे। इसी वजह से वह कुछ घंटों के लिए जंतर-मंतर से दूर रहेंगे। उन्होंने कहा कि आराम करने के बाद वह शाम तक दोबारा प्रदर्शन स्थल पर लौट आएंगे। वहीं, सूत्रों का कहना है कि सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच बातचीत का दूसरा दौर अभी तय नहीं हो पाया है क्योंकि संगठन सरकारी आवास या सरकारी दफ्तर में जाकर बैठक करने के पक्ष में नहीं है।