
CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का पेपर लीक के खिलाफ हाल ही में हुआ विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का मुद्दा बना रहा। कई दिनों तक चला यह आंदोलन सरकार के साथ बातचीक के बाद आखिरकार खत्म किया गया। इस बातचीत में अन्य मांगों के साथ CJP ने सरकार से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी की थी। CJP के अनुसार सरकार ने उनकी सभी मांगें स्वीकार कर ली थी जिसके बाद यह प्रदर्शन खत्म किया गया। हालांकि, अब मुंबई में स्थिति अलग दिखाई दे रही है क्योंकि यहां प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों और युवाओं को पुलिस की ओर से लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं और उन्हें पुलिस स्टेशन बुलाकर उनका बयान दर्ज किया जा रहा हैं। इस कारण प्रदर्शनकारियों के बीच फिर से चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।
सोमवार को भी मुंबई पुलिस ने पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों से जुड़े कई लोगों को नोटिस भेजे। कुछ लोगों को फोन कर पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा गया, जबकि कुछ के घर नोटिस पहुंचाने की कोशिश की गई। चेंबूर में हुए एक प्रदर्शन से जुड़े एक व्यक्ति को पुलिस स्टेशन बुलाकर उसका बयान दर्ज किया गया और उससे यह भी पूछा गया कि प्रदर्शन के दौरान कोई नारेबाजी हुई थी या नहीं। प्रदर्शनकारियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विक्रांत खरे ने कहा कि पुलिस को अभी तक जांच रोकने का कोई निर्देश नहीं मिला है। उन्होंने राज्य सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की कि जब तक मामलों को वापस लेने का औपचारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक जांच की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए ताकि छात्रों और युवाओं में डर का माहौल न बने।
मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जांच बीच में नहीं रोकी जा सकती। उनके अनुसार, किसी भी मामले को वापस लेने की प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब पुलिस अदालत में चार्जशीट दाखिल कर देती है। इसके बाद मामला एक जांच समिति के पास जाता है, जो तय करती है कि किन मामलों को वापस लिया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल पुलिस बयान दर्ज कर रही है, गवाहों से पूछताछ कर रही है, पंचनामा तैयार कर रही है और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर रही है। सरकार समय-समय पर ऐसे मामलों को वापस लेने के लिए सरकारी प्रस्ताव जारी करती है। मौजूदा प्रस्ताव की समय सीमा 31 जुलाई तक है। पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में तब तक चार्जशीट दाखिल होने की संभावना कम है, इसलिए सरकार को इस समय सीमा को आगे बढ़ाना पड़ सकता है।
CJP ने शनिवार को अपना प्रदर्शन खत्म करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार ने उनकी मांग मान ली है और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं करने का भरोसा भी दिया है। लेकिन सोमवार को पार्टी नेताओं ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि सरकार अपने वादे पर अमल नहीं कर रही है। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सभी FIR तुरंत वापस लेने और इस संबंध में लिखित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
छात्रों को लगातार जारी किए जा रहे नोटिसों के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने भी मामले में दखल दिया है। AISF के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के नेता रोहित पवार के साथ महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते से मुलाकात की। छात्र संगठन का कहना है कि लगातार पुलिस कार्रवाई से छात्रों में डर और तनाव बढ़ रहा है। संगठन ने मांग की है कि जब सरकार मामलों को वापस लेने की बात कह चुकी है, तब तक नए नोटिस जारी नहीं किए जाने चाहिए और प्रदर्शनकारियों को पुलिस स्टेशन नहीं बुलाया जाना चाहिए।