Reclaim Encroached Land in Assam: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 1250 वर्ग किलोमीटर कब्जाई जमीन वापस लेने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में अतिक्रमण हटाओ अभियान तेज हो गया है। इसकी तस्वीरें भी उन्होंने शेयर की है।
Himanta Biswa Sarma: सीएम बनने के बाद से ही हिमंता बिस्वा सरमा एक्शन मोड में हैं। असम में जमीन कब्जा हटाने को लेकर मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया है। लगातार दूसरी बार सरमा राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। सरमा ने कहा कि राज्य की एनडीए सरकार 1250 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा कब्जाई गई जमीन को वापस लेने के मिशन पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस दिशा में प्रशासन ने जमीनी स्तर पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। सीएम सरमा ने सोशल मीडिया सीटर 'X' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि 'NDA 3.0 असम की कब्जाई गई 1250 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन को वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध है और इस वादे को पूरा करने के लिए हमारी टीम मैदान में उतर चुकी है।' इसके साथ उन्होंने एक दिन पहले चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान की कुछ तस्वीरें भी शेयर की।
दरअसल, पिछले कुछ समय से असम सरकार अलग-अलग जिलों में सरकारी और वन भूमि पर कथित अवैध कब्जों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। कई जगहों पर प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई भी कर चुका है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक जमीन को मुक्त कराना जरूरी है, जबकि विपक्ष इन अभियानों को लेकर सवाल उठा रहा है। यह मामला काफी पुराना है, जिसमें इस बात को लेकर दावा किया गया है कि राज्य जमीन के बहुत बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा है। बीजेपी लगातार इस मुद्दे को उठाती रही है।
इसी बीच राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने की चर्चा भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सरमा ने हाल ही में इसका समर्थन किया था। हालांकि, विपक्षी पार्टी AIUDF ने इसका खुलकर विरोध किया है। AIUDF के महासचिव रफीकुल इस्लाम ने कहा कि असम में पहले ही NRC जैसी बड़ी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें पांच साल तक गहन जांच की गई थी। ऐसे में फिर से नया सर्वे कराने का कोई मतलब नहीं बनता। उनका कहना है कि इससे सिर्फ लोगों को परेशानी होगी और समय बर्बाद होगा। रफीकुल इस्लाम ने कहा कि NRC की अंतिम सूची आने के बाद कई दावे गलत साबित हो गए। पहले लाखों अवैध घुसपैठियों की बात कही जाती थी, लेकिन अंतिम सूची में करीब 19 लाख लोगों के नाम ही बाहर हुए।