Cockroach Janata Party के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग दोहराते हुए नया अल्टीमेटम जारी किया। उन्होंने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर वे देशभर में युवाओं को संगठित करेंगे और दिल्ली में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन आयोजित करेंगे।

Cockroach Janata Party के फाउंडर अभिजीत दीपके ने रविवार को फिर से एक अल्टीमेटम देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दे दिया। सोशल मीडिया साइट पर वीडियो जारी करके अभिजीत दीपके ने कहा कि जैसे की हमारी मांग थी कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। अगर आगे भी उनका इस्तीफा नहीं आता है तो मैं देश के अलग-अलग हिस्सों में जाऊंगा और युवाओं को एकजुट करूंगा और दिल्ली सब एकजुट होकर सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करेंगे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पहचान बनाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बार फिर देश की मौजूदा राजनीति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। महाराष्ट्र के संभाजीनगर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से देश की राजनीति ऐसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिनका युवाओं की असली समस्याओं से कोई सीधा संबंध नहीं है। अभिजीत दीपके ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और छात्रों के भविष्य जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा होने के बजाय राजनीतिक बहस अक्सर हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों तक सीमित रह जाती है। उनके मुताबिक, इससे युवाओं की वास्तविक चुनौतियां पीछे छूट जाती हैं और जरूरी सवालों से ध्यान भटक जाता है। आपको बता दें कि वो अपने घर महाराष्ट्र गए हुए हैं।
जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर चुके दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी दोहराया। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले और परीक्षा प्रणाली से जुड़े अन्य विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं के बावजूद जवाबदेही तय नहीं हो रही है। उनका कहना था कि किसी भी व्यवस्था में जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है। यदि लगातार समस्याएं सामने आ रही हैं और कोई इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, तो फिर व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने दावा किया कि केंद्र सरकार की कुछ नीतियों का असर सीधे तौर पर छात्रों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ाया है।