
भारत में हाथी पालने का रिवाज बरसों से रहा है। पुराने जमाने में राजा-महाराजाओं के पास सैकड़ों हाथी होते थे। उनमें से कुछ उन्हें बहुत प्रिय भी होते थे। हाथियों के सेवा के लिए नौकर भी रखे जाते थे। लेकिन आज के समय में ऐसा कम हो गया है। आज का दिन भारत खासकर असम के लोगों के लिए कुछ खास अच्छा नहीं रहा। दरअसल, आज भारत के सबसे उम्रदराज पालतू हाथी 'बिजुली प्रसाद' की 89 साल की उम्र में असम के सोनितपुर जिले में मौत हो गई। हाथी ने सुबह 3ः30 बजे बेहली चाय एस्टेट में दम तोड़ा
पिछले काफी समय से बीमार चल रहा था बिजुली
मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिजुली प्रसाद नाम के हाथी की उम्र करीब 89 साल थी और वह भारत के सबसे उम्रदराज हाथी था। वह अपनी उम्र के कारण पिछले काफी समय से बीमार चल रहा था। बागान के अधिकारियों ने बताया कि उसे काफी छोटी उम्र में बरगांग बागान में लाया गया था।
10 साल पहले प्रसाद के सारे दांत टूट चुके थे
डॉ कुशल कोंवर सरमा ने बताया कि बिजुली प्रसाद के सारे दांत 10 साल पहले टूट चुके थे। जिसके बाद वह कुछ खा नहीं पा रहा था और मरने वाला था। मैं वहां गया और उसका इलाज किया। मैंने उसका पूरा नियमित भोजन बदलवा दिया और उसे ज्यादातर उबला हुआ भोजन जैसे चावल और उच्च प्रोटीन वाला सोयाबीन दिया जाने लगा। इससे उसकी उम्र बढ़ गई।' बेहली चाय बागान के एक अधिकारी ने कहा कि हाथी को हर दिन 25 किलो भोजन दिया जाता था। 10 साल पहले प्रसाद के सारे दांत टूट चुके थे।
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