Abhigyan App Details: गृह मंत्री अमित शाह ने 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन में 'अभिज्ञान' ऐप लॉन्च किया। यह ऐप 35 सेकेंड में संदिग्ध की क्राइम हिस्ट्री उपलब्ध कराएगा। एनएएफआईएस से जुड़े इस सिस्टम से पुलिसिंग मजबूत होगी। शाह ने तीन साल में न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने और लंबित मामलों के निपटारे की भी बात कही।

Home Minister Amit Shah: वह दिन दूर नहीं जब ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सड़क पर ही संदिग्ध व्यक्ति के फिंगर प्रिंट चैक कर सकेगा और वह अपराधी हुआ तो 35 सैकेंड में उसकी क्राइम कुंडली स्मार्ट फोन में सामने आ जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को यहां शाह ने 26वें अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन 2026 के दौरान नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से विकसित ऐसा ऐप 'अभिज्ञान' लॉन्च किया। देश भर की पुलिस और जांच एजेंसियों को जल्द ही पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर से लैस किया जाएगा। अभिज्ञान ऐप राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआइएस) से जुड़ा है जो 1.30 करोड़ आरोपियों, दोषियों, आपराधिक रिकॉर्ड वाले संदिग्धों, जेल में बंद कैदियों का फिंगरप्रिंट स्कैन प्लेटफाॅर्म है। सम्मेलन में अभिज्ञान पर प्रजेंटेशन में यह जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यह डेटा एकत्र करने के लिए आपराधिक प्रक्रिया पहचान कानून, 2022 में अनुमति दी गई है। फिलहाल फिंगर प्रिंट जांच सुविधा देश में 1556 पुलिस वर्क स्टेशनों पर है। शाह ने कहा कि नई व्यवस्था से जमीनी स्तर पर पुलिसिंग मजबूत होगी।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नए दंड कानूनों को लागू करने के साथ सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता है कि देश के किसी भी कोने में अपराध दर्ज होने के बाद न्यायिक प्रक्रिया को तेज, प्रभावी और समयबद्ध बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा तंत्र विकसित करना है, जिसके तहत अपराध दर्ज होने से लेकर आरोपी को दोषी सिद्ध करने और सुप्रीम कोर्ट तक पूरी न्यायिक प्रक्रिया को तीन वर्षों के भीतर पूरा किया जा सके।
अमित शाह ने बताया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए गृह मंत्रालय विभिन्न स्तरों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट और देश के विभिन्न हाई कोर्ट के साथ मिलकर लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है। इसके तहत न्यायिक व्यवस्था में आवश्यक सुधारों और प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सायंकालीन अदालतों की स्थापना की दिशा में भी काम चल रहा है। साथ ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटान के लिए नई व्यवस्था विकसित की जा रही है। शाह ने स्पष्ट कहा कि न्याय मिलने में किसी भी प्रकार की देरी अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।