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AI: देश के कॉर्पोरेट जगत और जॉब मार्केट से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर एक बेहद अच्छी खबर आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा साइंस सीखकर अपने करियर को अपग्रेड करने वाली भारतीय महिलाओं की सैलरी में औसतन 145 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सैलरी हाइक के मामले में महिलाओं ने पुरुष साथियों को भी पीछे छोड़ दिया है।
यह खुलासा टेक-अपस्किलिंग संस्थान 'स्केलर' की 'इंडिया एआइ वर्कफोर्स रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार एआई सेक्टर में करियर बनाने के लिए पारंपरिक इंजीनियरिंग डिग्री बीटेक की अनिवार्यता खत्म हो रही है। देश में एआइ की लगभग 50 प्रतिशत नौकरियां अब इंजीनियरिंग के दायरे से बाहर की हो चुकी हैं।
यह रिपोर्ट भारत के 317 शहरों में फैले 11,444 वर्क प्रोफेशनल्स के डाटा पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, एआइ स्किल्स सीखने वाले हर चार में से एक प्रोफेशनल का बैकग्राउंड पूरी तरह से गैर-तकनीकी जैसे कॉमर्स या आर्ट्स का है। मानव संसाधन, डिजिटल मार्केटिंग, फाइनेंस और कंटेंट राइटिंग जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवर केवल 'जेनरेटिव एआइ' टूल्स और डाटा एनालिटिक्स सीखकर अपनी कंपनियों में एआइ-प्रॉम्प्ट इंजीनियर और डाटा ट्रांसफॉर्मेशन स्पेशलिस्ट जैसे नए और उच्च वेतन की भूमिका हासिल कर रहे हैं।
इस तकनीकी बदलाव का लाभ सिर्फ दिल्ली, मुंबई या बेंगलूरु जैसे बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर 5 में से 1 एआइ लर्नर अब जयपुर, लखनऊ, इंदौर, पटना और नागपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है। ये पेशेवर वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल के जरिए वैश्विक कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एआइ स्किल्स से लैस होने के बाद देश में सीनियर लीडरशिप स्तर के पेशेवरों का औसत सालाना पैकेज 33 लाख सलाना तक पहुंच गया है।
Updated on:
20 Jun 2026, 4:34 AM IST
Published on:
20 Jun 2026, 4:34 AM IST
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