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United Nation: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया भर के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में 24,174 बच्चे गंभीर हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों का शिकार हुए हैं। इनमें बच्चों की हत्या, यौन हिंसा, अपहरण और उन्हें जबरन लड़ाई में शामिल करने जैसी घटनाएं शामिल हैं। बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघनों की कुल संख्या बढ़कर 38,558 पहुंच गई। यह संख्या लगातार चौथे साल में हुई वृद्धि को दर्शाती है। रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले 30 वर्षों में पहली बार विद्रोही समूहों की बजाय सरकारी सुरक्षा बल बच्चों के विरुद्ध होने वाले अधिकांश गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाए गए है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की ओर से जारी इस वार्षिक रिपोर्ट में 8 देशों की सरकारी सेनाओं और 16 देशों व क्षेत्रों के 67 सशस्त्र समूहों को उल्लंघनकर्ताओं की सूची में शामिल किया गया है। प्रभावित हुए बच्चों में लगभग एक-तिहाई लड़कियां थीं। कई बच्चों को एक से अधिक प्रकार के अत्याचारों का सामना करना पड़ा।
उल्लंघनों की सूची में इजरायली सेना और सुरक्षा बल सबसे ऊपर रहे, जिन पर 12,445 उल्लंघनों का आरोप दर्ज किया गया। इसके बाद कांगो में 4,114 मामले सामने आए। वहीं म्यांमार, सोमालिया और नाइजीरिया के सशस्त्र समूहों के खिलाफ भी 2,000 से अधिक उल्लंघनों के मामले दर्ज हुए।
रिपोर्ट के अनुसार , वर्ष 2025 में 6,266 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा 7,958 बच्चे घायल हुए। गाजा पट्टी में इजरायली बलों की कार्रवाई में 2,668 फिलिस्तीनी बच्चों की मौत हुई, जबकि वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में 55 बच्चों की जान गई। वहीं गाजा में 4,588 अन्य बच्चों की मौत और 346 इजरायली बच्चों के घायल होने की रिपोर्टों की अभी जांच चल रही है।
2025 में 6,607 बच्चों को संघर्षों में भर्ती किया गया। ऐसे मामलों की सबसे अधिक संख्या कांगो, नाइजीरिया, हैती, सोमालिया और कोलंबिया में दर्ज की गई। इसके अलावा 5,129 बच्चों के अपहरण की पुष्टि हुई, जिनमें सबसे ज्यादा मामले नाइजीरिया, कांगो, सोमालिया, म्यांमार और मोजाम्बिक से सामने आए। यौन हिंसा के मामलों में 1,783 बच्चों के पीड़ित होने की पुष्टि हुई।
Published on:
20 Jun 2026 05:06 am
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