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कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल! महंगाई ने फिर बढ़ाई लोगों की टेंशन, जानें कारण?

Crude Oil Prices: क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और कमजोर मानसून से महंगाई का दबाव बढ़ा है। पहले तेल की कीमत करीब 85 डॉलर प्रति बैरल थी। लेकिन अब इंडियन बास्केट के लिए यह कीमत करीब 120 डॉलर तक पहुंच गई है।
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Oct 05, 2026
Crude Oil Prices Hike
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी (सोर्स-आईएएनएस)

Crude Oil Prices Hike: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। महंगे तेल का असर अब महंगाई पर पड़ने का खतरा है। कमजोर मानसून ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। क्रिसिल की प्रिंसिपल और इकोनॉमिस्ट दीप्ति देशपांडे ने इसे लेकर अहम संकेत दिए हैं। उनके मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

क्रूड ऑयल 120 के करीब

दीप्ति देशपांडे के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव आया है। पहले तेल की कीमत करीब 85 डॉलर प्रति बैरल थी। लेकिन अब इंडियन बास्केट के लिए यह कीमत करीब 120 डॉलर तक पहुंच गई है। महंगे क्रूड का सीधा असर कंपनियों की लागत पर पड़ता है। कंपनियों के लिए उत्पादन महंगा हो जाता है। ऐसे में कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इसका असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर दिख सकता है। खासकर तब, जब दक्षिण-पश्चिम मानसून में करीब 13 फीसदी बारिश की कमी दर्ज हुई है। कमजोर बारिश से कृषि और खाद्य कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।

अक्टूबर में RBI कर सकता है 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी

महंगाई के बढ़ते जोखिम के बीच मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी यानी MPC के फैसले पर सबकी नजर है। क्रिसिल (Crisil’s) को अक्टूबर की पॉलिसी में 25 बेसिस पॉइंट की रेट हाइक की उम्मीद है। इसके बाद वित्त वर्ष के अंत तक एक और बढ़ोतरी हो सकती है। यानी पूरे वित्त वर्ष में ब्याज दरों में कुल 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कंपनियों का निवेश रुक जाएगा। देशपांडे के मुताबिक, ब्याज दर कॉर्पोरेट निवेश का सबसे बड़ा फैक्टर नहीं है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन करीब 75 फीसदी है। यह स्तर आमतौर पर कंपनियों को नई क्षमता बनाने के लिए प्रेरित करता है।

भारत के पास मजबूत बफर

क्रूड की तेजी और ग्लोबल मॉनेटरी सख्ती के कारण 10 साल की G-Sec यील्ड (जी-सेक यील्ड) 7 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। हालांकि, मार्च तक इसमें कुछ नरमी आने की उम्मीद है। देशपांडे के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था के पास कई मजबूत बफर हैं। कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत है। बैंकिंग सिस्टम में NPA का स्तर कम है। घरेलू मांग भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है। रुपये को लेकर भी फिलहाल ज्यादा चिंता नहीं है। देशपांडे को रुपये में मजबूती की गुंजाइश दिख रही है। लेकिन अगर कच्चे तेल की महंगाई और जियोपॉलिटिकल तनाव लंबे समय तक जारी रहे, तो ये बफर धीरे-धीरे कमजोर हो सकते हैं। इसलिए आने वाले महीनों में क्रूड, मानसून और RBI की पॉलिसी पर बाजार की नजर रहेगी।

बता दें यहां भारत का 10 साल की G-Sec यील्ड का मतलब 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड से है।

Updated on:
05 Oct 2026 05:50 pm
Published on:
05 Oct 2026 05:50 pm