
Delhi Parliament Chalo March 2026: दिल्ली में 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद चलो मार्च का आयोजन किया था। इसमें पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने हो गए थे। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान द्वारा पेलेट गन से सात राउंड फायर किए जाने का खुलासा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की आंतरिक जांच में हुआ है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से पांच पेलेट प्रदर्शनकारियों को लगीं, जबकि दो किसी को नहीं लगीं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे और प्रदर्शन हिंसक हो गया था। घटना के बाद भीड़ नियंत्रण के दौरान अपनाए गए उपायों की जांच के लिए CRPF ने आंतरिक जांच के आदेश दिए थे।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की जांच में यह भी सामने आया है कि RAF के एक कांस्टेबल ने कंपनी कमांडर की अनुमित मिलने के बाद पेलेट गन से सात राउंड किए थे। इनमें से पांच राउंड प्रदर्शनकारियों को लगे। अब जांच इस बात की भी कर रही है कि पेलेट गन का इस्तेमाल फोर्स के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुरूप था या नहीं।
रिपोर्ट् में यह भी बताया गया है कि पेलेट गन लगने से तीन लोग घायल हुए है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों की पहचान भी हुई है। घायलों में 25 वर्षीय इरशाद शेख, जो गुरुग्राम में काम करते हैं, दिल्ली विश्वविद्यालय के 19 वर्षीय छात्र साहिल लोछाब और आउटलुक मैगजीन के 28 वर्षीय एक पत्रकार शामिल हैं।
घटना के बाद प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया था कि छात्रों के खिलाफ पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया था। पुलिस ने कहा था कि उसके पास पेलेट गन नहीं हैं और इस तरह के दावे भ्रामक हैं।
बाद में CRPF ने स्पष्ट किया था कि RAF, जो बल की विशेष दंगा-रोधी इकाई है, भीड़ नियंत्रण के लिए पेलेट गन से लैस रहती है। साथ ही, इन आरोपों की जांच के लिए आंतरिक जांच शुरू की गई थी।
इससे पहले News18 की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान RAF के कुछ जवानों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने के मामले सामने आए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, RAF के शीर्ष अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की समीक्षा की थी। इसमें पाया गया कि कुछ जवानों की कार्रवाई फोर्स की पेशेवर आचार संहिता के अनुरूप नहीं थी और इसे किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।