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डीपफेक मामले को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई, जज ने राघव चड्ढा से कहा- ‘आपका फैसला आलोचना का विषय है’

Raghav Chadha defamatory content: दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। साथ ही बीजेपी जॉइन करने पर कोर्ट ने साफ कहा है कि राजनीतिक आलोचना रोकी नहीं जा सकती है।
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May 21, 2026
Raghav chadha News
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा। (फोटो- ANI)

दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रहे अपमानजनक कंटेंट, डीपफेक वीडियो और अपनी इमेज के दुरुपयोग को हटाने की मांग की थी।

इस पर कोर्ट ने साफ कहा कि उनका बीजेपी में जाना राजनीतिक फैसला है और इसकी आलोचना होना स्वाभाविक है। इसमें पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं दिखता।

राजनीतिक बदलाव के बाद विवादों का सिलसिला

राघव चड्ढा पहले आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख चेहरे थे, अप्रैल 2026 में वह कई अन्य राजसभा सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए। यह कदम AAP के लिए बड़ा झटका था।

चड्ढा ने पार्टी छोड़ते हुए कहा था कि आप अब मूल सिद्धांतों से भटक गई है, लेकिन विपक्षी दलों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सवालों घेरे में लिया।

जॉइनिंग के बाद उनके खिलाफ मीम्स, पुरानी क्लिप्स को तोड़-मरोड़कर बनाए गए वीडियो और AI टूल्स से तैयार फेक स्पीच तेजी से वायरल होने लगे। इन्हीं को 'डिफेमेटरी' बताते हुए चड्ढा ने हाईकोर्ट का रुख किया और अपनी पर्सनालिटी राइट्स की रक्षा की मांग की।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी- 'आलोचना और व्यंग्य को अलग रखें'

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ने कहा- आपका राजनीतिक फैसला (बीजेपी में जाना) आलोचना का विषय है। इसमें पर्सनालिटी राइट का उल्लंघन नहीं दिखता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पर्सनालिटी राइट्स मुख्य रूप से कमर्शियल दुरुपयोग से बचाने के लिए होते हैं, न कि राजनीतिक आलोचना या सटायर से।

कोर्ट ने AI जनरेटेड डीपफेक, मॉर्फ्ड इमेज और फेक वॉइस क्लोनिंग जैसे कंटेंट को 'अपमानजनक' माना, लेकिन साथ ही फ्री स्पीच के अधिकार पर भी जोर दिया। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।

डीपफेक का बढ़ता खतरा और नेताओं की चिंता

राघव चड्ढा का यह केस सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। आजकल राजनीति में एआई का इस्तेमाल आम हो गया है। कई नेता इसी तरह की याचिकाएं दायर कर चुके हैं।

सोशल मीडिया पर एक क्लिक में किसी की इमेज या आवाज बदल दी जाती है, जो न सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है बल्कि जनता को भी गुमराह करता है।

चड्ढा की याचिका में जॉन डो (अज्ञात लोगों) के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। अगर कोर्ट राहत देता है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट हटाने के लिए सख्त निर्देश मिल सकते हैं।

Updated on:
21 May 2026 02:38 pm
Published on:
21 May 2026 02:38 pm