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‘आरएसएस वालों सुन लो, माफी नहीं मांगूंगा’, राहुल गांधी के इस बयान पर पीयूष गोयल ने किया करारा पलटवार

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भारत

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MI Zahir

May 21, 2026

Union Minister Piyush Goyal

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल। ( फोटो: ANI)

Piyush Goyal Reaction : भारतीय सियासत में पक्ष-विपक्ष के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए विवादित बयान के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभाल लिया है। गोयल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जहां एक तरफ पूरी दुनिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जता रही है, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी लगातार अपनी नकारात्मक सोच का प्रदर्शन कर रहे हैं। गोयल के मुताबिक, राहुल गांधी के हालिया भाषण उनकी गहरी हताशा और निराशा दर्शाते हैं, यही वजह है कि देश की जनता चुनावों में उन्हें बार-बार नकार रही है।

पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के पद की गरिमा का ख्याल न रखते हुए उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया है। गोयल ने कहा, 'यह देश का दुर्भाग्य है कि खुद को बड़ा नेता कहने वाले राहुल गांधी ऐसी भाषा का सहारा ले रहे हैं। 'गालियां हमेशा कमजोरों का हथियार होती हैं' और राहुल गांधी की शब्दावली से साफ है कि वे राजनीतिक रूप से कितने कमजोर हो चुके हैं।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस और गांधी परिवार अपनी विफलताएं छिपाने के लिए इस स्तर की राजनीति पर उतर आए हैं।

'राजद्रोह' शब्द पर पीयूष गोयल के तीखे सवाल

राहुल गांधी की ओर से सरकार के खिलाफ बार-बार 'राजद्रोह' और 'गद्दार' जैसे भारी-भरकम शब्दों के इस्तेमाल पर पीयूष गोयल ने कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कई तीखे सवाल पूछते हुए कहा: क्या देश से नक्सलवाद का सफाया करना राजद्रोह है, या फिर कांग्रेस के राज में सालों तक नक्सलवाद को बढ़ावा देना राजद्रोह था?

क्या विदेशी धरती पर भारत और उसके तिरंगे का अपमान देशभक्ति है ?

क्या आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना राजद्रोह है, या फिर उन्हें बिरयानी खिलाना और उनसे समझौता करना राजद्रोह था? गोयल ने कहा कि कांग्रेस और गांधी परिवार हमेशा से घुसपैठियों के समर्थन में खड़ा नजर आता है, जो वास्तव में देश के साथ खिलवाड़ है।

पीएम मोदी के विदेश दौरे की सफलता से खलबली

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की हालिया पांच देशों (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरे ने वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। इन पांच दिनों में पूरी दुनिया में भारत की आर्थिक कूटनीति की चर्चा रही। पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर, एआई (AI), डिफेंस, एनर्जी और वैश्विक निवेश को बढ़ावा देने के लिए दुनिया की 50 से अधिक बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) के साथ बैठकें कीं।

क्या था राहुल गांधी का बयान ?

दरअसल, यह पूरा विवाद राहुल गांधी के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने देश में "आर्थिक तूफान" की चेतावनी दी थी और पीएम मोदी की विदेश नीति की आलोचना की थी। राहुल गांधी ने इटली के दौरे पर पीएम मोदी और इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुए चर्चित 'टॉफी मोमेंट' पर भी तंज कसा था। इसके साथ ही राहुल ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को 'गद्दार' कहते हुए साफ किया था कि, 'आरएसएस के लोग सुन लें, मैं अपने बयान के लिए कभी माफी नहीं मांगूंगा। ये लोग संविधान पर हमला कर रहे हैं और मैं इनसे डरने वाला नहीं हूं।' इसी बयान पर अब भाजपा ने चौतरफा हमला शुरू कर दिया है।

'प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए 'गद्दार' जैसे शब्दों का उपयोग संविधान का अपमान'

भाजपा खेमे ने राहुल गांधी के बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। वरिष्ठ भाजपा नेताओं का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए 'गद्दार' जैसे शब्दों का उपयोग करना लोकतंत्र और संविधान का अपमान है। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है, जहां यूजर्स इसे विपक्ष की हताशा का प्रतीक बता रहे हैं।

कांग्रेस अपने बयान से पीछे नहीं हटेगी

इस बयानबाजी के बाद आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक हंगामा बढ़ने की संभावना है। भाजपा इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन की योजना बना रही है, जबकि कांग्रेस इस रुख पर कायम है कि वह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अपने बयान से पीछे नहीं हटेगी।

विपक्ष की ओर से सरकार की सफल वैश्विक छवि धूमिल करने की रणनीति

बहरहाल, इस पूरे विवाद का एक पहलू यह भी है कि राहुल गांधी ने पीएम मोदी के टॉफी वाले कूटनीतिक पलों पर निशाना साधा है, जिसे सोशल मीडिया पर बहुत लोकप्रियता मिली थी। विशेषज्ञ इसे विपक्ष की ओर से सरकार की सफल वैश्विक छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देख रहे हैं, ताकि घरेलू मोर्चे पर महंगाई और आर्थिक मुद्दों को हवा दी जा सके। (इनपुट: ANI)