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Delhi NCR Air Pollution: ’30 सिगरेट रोज पीने जैसा हाल!’ दिल्ली की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा, किसकी लापरवाही पड़ रही भारी?

Supreme Court Delhi Pollution Hearing: दिल्ली की हवा में घुलते जहर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर चर्चा हुई। सुनवाई के दौरान वाहनों के धुएं और पराली जलाने के अलावा कई स्थानीय कारणों पर भी ध्यान दिलाया गया। बारिश से मिली राहत के बावजूद राजधानी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।
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Updated: 6 Nov 2026, 12:52 PM IST
Supreme Court Delhi Pollution Hearing
Supreme Court Delhi Pollution Hearing : दिल्ली-NCR में सांसों पर संकट: सुप्रीम कोर्ट में उठा प्रदूषण का मुद्दा, परिवहन व्यवस्था पर सवाल (फोटो सोर्स: ANI)

Delhi Air Quality: दिल्ली-NCR में हवा फिर से खतरे की घंटी बजा रही है। लोगों की सेहत सांस से शुरू होकर तकलीफ तक पहुंच रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए सिर्फ पराली जलाने की बात नहीं की, बल्कि गाड़ियों से निकला धुआं और स्थानीय क्षेत्र का प्रदूषण भी गिनाया। असली सवाल ये है हम हवा सुधारने की बातें तो करते हैं, लेकिन जमीन पर असली कदम कब उठेंगे?

दिल्ली की जहरीली हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान प्रदूषण के कई कारणों पर चर्चा हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में गंभीरता दिखाई। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल रहे। अदालत की टिप्पणी और एमिकस क्यूरी की दलीलों से स्पष्ट हुआ कि राजधानी में वायु प्रदूषण की समस्या किसी एक वजह तक सीमित नहीं है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली के मौसम को लेकर टिप्पणी की। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि हवा इतनी खराब है कि लोगों को बोलने में भी परेशानी हो रही है। प्रदूषण के मौजूदा हालात की तुलना उन्होंने रोजाना 30 सिगरेट पीने से होने वाले नुकसान से की।

बारिश से राहत, लेकिन प्रदूषण का खतरा बरकरार

अदालत में चर्चा के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बारिश होने के कारण प्रदूषण का स्तर कुछ नीचे आया था। हालांकि, मौसम में बदलाव से मिलने वाली राहत स्थायी समाधान नहीं है। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासों की जरूरत है।

एमिकस क्यूरी ने बताया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान लगभग 14 प्रतिशत था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजधानी पहले से ही प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है और खेतों में पराली जलने की घटनाएं स्थिति को और गंभीर बना देती हैं।

सिर्फ पराली नहीं, वाहनों का धुआं भी बड़ी चुनौती

सुनवाई में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने परिवहन क्षेत्र को दिल्ली के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बताया।

उनके अनुसार, वाहनों से निकलने वाला धुआं राजधानी की हवा को लगातार खराब कर रहा है। इसके अलावा ऊर्जा उत्पादन, कचरा जलाने और एनसीआर के दूसरे स्थानीय स्रोतों से भी प्रदूषण फैल रहा है।

इस चर्चा ने प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए। यदि दिल्ली की हवा सुधारनी है, तो वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने, कचरा जलाने पर रोक लगाने और ऊर्जा क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रित करने जैसे कदमों पर भी ध्यान देना होगा।

पराली जलाने पर रोक और किसानों की भूमिका

मुख्य न्यायाधीश ने किसानों की बुवाई के मौसम का उल्लेख करते हुए पराली जलाने की समस्या पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह वह समय है जब किसान अगली फसल की बुवाई करेंगे। ऐसे में खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकना जरूरी है।

फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किसानों और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। पराली को जलाने के बजाय उसका दूसरे तरीकों से इस्तेमाल करने की व्यवस्था प्रदूषण कम करने में मदद कर सकती है।

दिल्ली-NCR के लिए व्यापक रणनीति की जरूरत

दिल्ली की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए अलग-अलग प्रदूषण स्रोतों पर एक साथ काम करना जरूरी है। वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण से उड़ने वाली धूल, कचरा जलाना और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण मिलकर हवा को प्रभावित करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में हुई चर्चा ने यह संकेत दिया कि समस्या का समाधान केवल मौसमी उपायों से नहीं निकलेगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्थानीय स्तर पर प्रभावी कदम, पराली प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था में सुधार आवश्यक हैं।

राजधानी के लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने के लिए अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित एजेंसियां इन समस्याओं से निपटने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करती हैं।

Updated on:
6 Nov 2026, 12:52 PM IST
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