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Delhi Building Collapse : ‘नौ महीने कोख में रखा, आज शव देख रही हूं’ दिल्ली हादसे में बेटे को खोकर टूट गए माता-पिता, सदमे में बहन

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन पीजी हादसे में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत सिंह यादव की मौत से परिवार सदमे में है। अधिकारी बनकर माता-पिता का नाम रोशन करने का सपना देखने वाले अक्षत के अधूरे सपनों और यादों ने परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है।
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Sep 07, 2026
Delhi Building accident
New Delhi: Satya Niketan Building Collapse Victims Brought to AIIMS (Photo-IANS)

Delhi Building Collapse : नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को हुए पीजी बिल्डिंग हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वालों में दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज का द्वितीय वर्ष का छात्र अक्षत सिंह यादव भी शामिल था। बेटे की मौत की खबर मिलते ही मध्यप्रदेश के कटनी स्थित डुबे कॉलोनी से उसका परिवार सोमवार सुबह दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। बेटे का शव देखते ही माता-पिता टूट गए, जबकि बहन लिची सदमे में है और कुछ बोल नहीं पा रही है। अक्षत के पिता राजस्थान के कोटा में काम करते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। हादसे से महज दो दिन पहले ही अक्षत ने मां से वीडियो कॉल पर बात की थी। परिवार को क्या पता था कि वह उनकी आखिरी बातचीत होगी।

'…अब सिर्फ तीन रह गए'

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्षत की तस्वीर मोबाइल में देखते हुए उसकी मां आंसू रोक नहीं पाईं। उन्होंने कहा कि जिस बेटे को नौ महीने कोख में रखा, गोद में खिलाकर बड़ा किया, आज उसी का शव सामने है। उन्होंने कहा कि पहले हम चार थे, अब सिर्फ तीन रह गए हैं। परिजनों के मुताबिक अक्षत रक्षाबंधन पर घर आया था। पिता ने उसे कुछ दिन और रुकने के लिए कहा था, लेकिन उसने दिल्ली लौटने की बात कही। उसका टिकट पहले से बुक था, इसलिए वह वापस चला गया।

वीडियो कॉल पर बहन को दिखाने को कहा था

अक्षत को तलवारों का खास शौक था। हाल ही में करीब 2,500 रुपए की तलवार उनके घर पहुंची थी। परिवार ने वीडियो कॉल के दौरान उसे तलवार दिखाई तो वह काफी खुश हुआ था। उसने परिवार से कहा था कि इसे रखने से पहले उसकी बहन लिची को जरूर दिखाना। आज वही तलवार परिवार के लिए बेटे की आखिरी यादों में शामिल हो गई है।

किताबों और क्विज प्रतियोगिताओं में थी दिलचस्पी

परिजन बताते हैं कि अक्षत पढ़ाई में होनहार था और उसे किताबें पढ़ने का काफी शौक था। जब भी उसके पास अतिरिक्त पैसे होते, वह किताबें खरीद लेता था। वह विभिन्न प्रतियोगिताओं और क्विज में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लेता था। शिक्षक भी उसकी पढ़ाई और प्रदर्शन की अक्सर तारीफ करते थे। अक्षत का सपना सिविल सेवा में जाने का था।

पिता से कहता था- एक दिन अफसर बनकर आपको गर्व महसूस कराऊंगा

अक्षत के पिता के मुताबिक उनका बेटा अक्सर उनसे कहता था कि पापा, एक दिन मैं अफसर बनूंगा और आपको गर्व महसूस कराऊंगा। परिवार के अनुसार अक्षत नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहता था और घर आने पर अपना ज्यादातर समय परिवार के साथ बिताता था। करीब डेढ़ महीने की छुट्टी के दौरान भी वह ज्यादातर समय घर पर ही रहा और केवल दो बार अपने भांजे के साथ बाहर गया।

पिता ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

बेटे को खोने के बाद अक्षत के पिता ने प्रशासन से हादसे की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पीजी और ऐसी इमारतों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को इन इमारतों में इस भरोसे से भेजते हैं कि वे सुरक्षित हैं। उन्हें कभी नहीं लगा था कि वहां उनका बेटा ही सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि अब परिवार के पास बेटे की सिर्फ यादें रह गई हैं। अक्षत की पढ़ाई, प्रतियोगिताओं और यूपीएससी की तैयारी को लेकर कई सपने थे। सत्य निकेतन हादसे ने न सिर्फ एक होनहार छात्र की जिंदगी छीन ली, बल्कि उसके परिवार के उन सपनों को भी अधूरा छोड़ दिया, जिन्हें लेकर वह आगे बढ़ रहा था।

Updated on:
07 Sept 2026 03:36 pm
Published on:
07 Sept 2026 03:36 pm