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ईरान जंग का सीधा असर अब फ्लाइट पर, DGCA ने पायलटों के लिए बदला नियम, पढ़ें ताजा अपडेट

अगर आपने हाल में कोई इंटरनेशनल फ्लाइट ली है और वो लेट हुई या सफर पहले से ज्यादा लंबा लगा तो इसकी वजह ईरान की जंग है। मध्य पूर्व के कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। यानी यूरोप, अमेरिका और दूसरी दिशाओं में जाने वाली भारतीय उड़ानें अब सीधे नहीं जा […]

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Apr 07, 2026
प्रस्तुति के लिए इस्तमाल की गई तस्वीर। (फोटो- AI)

अगर आपने हाल में कोई इंटरनेशनल फ्लाइट ली है और वो लेट हुई या सफर पहले से ज्यादा लंबा लगा तो इसकी वजह ईरान की जंग है।

मध्य पूर्व के कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। यानी यूरोप, अमेरिका और दूसरी दिशाओं में जाने वाली भारतीय उड़ानें अब सीधे नहीं जा सकतीं। उन्हें लंबा घुमावदार रास्ता लेना पड़ रहा है। और इससे उड़ान का वक्त काफी बढ़ गया है।

पायलट की ड्यूटी के नियम क्यों बदले?

पिछले साल DGCA यानी नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पायलटों के लिए नए नियम बनाए थे। इनका मकसद था कि थके हुए पायलट फ्लाइट न उड़ाएं।

नए नियमों में पायलटों को 48 घंटे का लगातार आराम देना जरूरी था। उड़ान का वक्त भी तय था। लेकिन ईरान युद्ध की वजह से रास्ते लंबे हो गए हैं।

एयरलाइंस के लिए उन्हीं नियमों के साथ लंबी उड़ानें चलाना मुश्किल हो गया है। अगर नियम नहीं बदलते तो या तो उड़ानें रद्द होतीं या शेड्यूल बिगड़ता। इसलिए DGCA ने फिलहाल 30 अप्रैल तक के लिए कुछ ढील दी है।

कितनी ढील मिली है?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने बताया कि दो पायलटों वाली लंबी उड़ानों के लिए उड़ान का समय डेढ़ घंटे बढ़ाकर 11 घंटे 30 मिनट कर दिया गया है। और ड्यूटी की कुल अवधि पौने दो घंटे बढ़ाकर 11 घंटे 45 मिनट की गई है। यानी पहले जो पायलट 10 घंटे उड़ाते थे, अब साढ़े 11 घंटे उड़ा सकते हैं।

क्या यह खतरनाक नहीं?

अब इससे फ्लाइट की खतरनाक होगी या नहीं, यह सवाल जेहन में आना स्वाभाविक है। DGCA ने खुद पिछले साल यह नियम इसलिए सख्त किए थे क्योंकि थके पायलट की वजह से हादसे का खतरा बढ़ता है। और अब वही नियम ढीले किए जा रहे हैं।

लेकिन सरकार का कहना है कि यह अस्थायी है और निगरानी बढ़ा दी गई है। DGCA अब एयरलाइंस की हर हफ्ते और हर पखवाड़े निगरानी कर रहा है। रोस्टर सही है या नहीं, क्रू उपलब्ध है या नहीं, नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह सब देखा जा रहा है।

आम यात्री पर क्या असर?

अगर आप अगले कुछ हफ्तों में विदेश जाने का प्लान कर रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है। यूरोप, अमेरिका या खाड़ी देशों की फ्लाइट पहले से ज्यादा वक्त लेगी। टिकट की कीमत बढ़ सकती है क्योंकि लंबे रास्ते में ज्यादा ईंधन लगता है। और कुछ उड़ानों का शेड्यूल बदल सकता है।

जंग से क्या हो रहा असर?

ईरान की जंग का असर सिर्फ तेल की कीमतों तक नहीं है। वो आपकी उड़ान के रास्ते तक आ गया है। और उस रास्ते को उड़ाने वाले पायलट अब पहले से ज्यादा घंटे काम कर रहे हैं।

30 अप्रैल तक की ढील है। उम्मीद यह है कि तब तक हालात सुधर जाएं। लेकिन अगर ईरान और अमेरिका के बीच डील नहीं हुई तो यह ढील और आगे बढ़ सकती है।

Published on:
07 Apr 2026 05:47 pm
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