
Dharmendra Pradhan Resignation: सीजेपी के आंदोलन के बाद शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। इस्तीफा देने के बाद पहली बार सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे। इस दौरान बीजेपी और एनडीए सांसदों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद के भी नारे लगाए गए।
वहीं शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर भी कयास लगाना शुरू हो गया है। दरअसल, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी आलाकमान जल्द ही धर्मेंद्र प्रधान को संगठन में नई जिम्मेदारी दे सकती है या फिर आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में पार्टी के चुनाव अभियान की अहम कमान सौंप सकता है।
NDTV ने अपनी एक रिपोर्ट में धर्मेंद्र प्रधान के समर्थकों के हवाले से लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए अपने पद का त्याग किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से जनता के बीच और उनके संसदीय क्षेत्र संबलपुर में उनकी राजनीतिक छवि और मजबूत होगी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का असर ओडिशा बीजेपी की आंतरिक राजनीति पर जरूर पड़ सकता है। जुएल ओराम के बाद वह राज्य से केंद्र सरकार में दूसरे प्रमुख कैबिनेट मंत्री थे।
हालांकि, पार्टी सूत्रों का मानना है कि इस्तीफे के बावजूद ओडिशा बीजेपी में धर्मेंद्र प्रधान का प्रभाव पहले जैसा ही बना रहेगा। 2014 के बाद राज्य में भाजपा के विस्तार और 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनकी रणनीतिक भूमिका मानी जाती है।
बताया जाता है कि ओडिशा भाजपा के 78 विधायकों में से अधिकांश और राज्य सरकार के करीब 40 प्रतिशत मंत्री उनके करीबी माने जाते हैं।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं हुई हैं, उनसे मुझे पीड़ा हुई है। यह मेरे व्यक्तिगत सम्मान का विषय नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि देश की युवा शक्ति ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। मेरा संकल्प है कि हम देश के युवाओं को भ्रम और अनिश्चितता के दुष्चक्र में नहीं फंसने देंगे।