
NSUI Vinod Jakhar: देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक NEET-UG धांधली और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक विवादों के बीच आखिरकार देश के शिक्षा तंत्र में एक बड़ा भूचाल आ गया है। चौतरफा घिरे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री को भेजे अपने पत्र में उन्होंने देश की एकता, युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों का हवाला देते हुए पद छोड़ने की बात कही। हालांकि, इस घटनाक्रम के तुरंत बाद छात्र राजनीति का पारा और अधिक चढ़ गया है।
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मंत्री के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इसे किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों न्यायप्रिय छात्रों और उनके परिवारों की ऐतिहासिक जीत बताया।
मीडिया से बातचीत करते हुए NSUI प्रमुख विनोद जाखड़ ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक मंत्री का पद छोड़ देना ही इस पूरे भ्रष्टाचार की भरपाई नहीं है।
"धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देश के लाखों-करोड़ों उन छात्रों की मेहनत की जीत है जो दिन-रात एक करके पढ़ाई करते हैं। लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। NTA जैसी भ्रष्ट और साख खो चुकी संस्था को तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित और भंग किया जाना चाहिए। जिन लोगों ने करोड़ों बच्चों के सपनों को बेचा है, उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए।"
जाखड़ ने केंद्र सरकार के समक्ष मांग रखी कि पेपर लीक के कारण अवसाद में आकर जिन छात्रों ने अपनी जान गंवाई है, उनके पीड़ित परिवारों के साथ सरकार तुरंत संवाद स्थापित करे। उन्होंने सरकार से मांग की कि:
भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए कड़ा केंद्रीय कानून लाया जाए।
निजीकरण के नाम पर शिक्षा को जो बेतहाशा महंगा किया जा रहा है, उस पर अंकुश लगाया जाए ताकि आम गरीब परिवार का बच्चा भी पढ़ सके।
घटनाक्रम का जिक्र करते हुए छात्र नेताओं ने कहा कि यह बदलाव रातों-रात नहीं आया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर देश भर में शुरू हुए छात्र आंदोलन और दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न युवा संगठनों के विशाल विरोध-प्रदर्शनों ने सरकार को सोचने पर मजबूर किया।
प्रोटेस्ट के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए NSUI ने अपने कार्यालयों के दरवाजे छात्रों के रहने, खाने और कानूनी सहायता के लिए खोल दिए थे।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि वे नहीं चाहते कि जंतर-मंतर पर बने हालात का कोई देशविरोधी तत्व फायदा उठाए या छात्र अदालती चक्करों में उलझें। लेकिन विपक्ष और छात्र संगठनों का स्पष्ट मानना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल सुधार और NTA जैसे ढांचे का पुनर्गठन नहीं होता, तब तक युवाओं का यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।