
Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने NEET-UG पेपर लीक विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दिया है। जंतर मंतर पर छात्रों के बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव की स्थिति बनने के बाद उन्होने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा। अपने इस्तीफे में उन्होने लिखा कि, उन्होंने चार दशकों से ज्यादा समय छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित किया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई की, जिसमें परीक्षा रद्द करना, CBI जांच का आदेश देना और दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लेना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले साल से परीक्षा कंप्यूटर-आधारित मोड में आयोजित की जाएगी।
प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि किसी भी होनहार छात्र को इससे नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और पूरे देश में मचे हंगामे से उन्हें दुख हुआ है और वे देश की एकता की रक्षा करने और देश-विरोधी ताकतों को स्थिति का फायदा उठाने से रोकने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं।
3 मई को हुई NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक मामले में देशभर में हंगामा मच गया ।
हालांकि जांचकर्ताओं ने परीक्षा से पहले छात्रों के बीच गेस पेपर के तौर पर एक प्रश्न सेट बांटने का हवाला दिया जिसमें कई सवाल असली पेपर से काफी मिलते-जुलते थे। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी और सरकार ने मामले को पूरी जांच के लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दिया।
अंडरग्रेजुएट मेडिकल और डेंटल कोर्स में दाखिले के लिए होने वाली इस परीक्षा में लगभग 22.79 लाख छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा रद्द होना NEET के 13 साल के इतिहास में पहली बार पूरी तरह से रद्द होने की घटना थी।
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम के युवाओं के एक व्यंग्यात्मक अभियान ने 20 जून को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उनकी मांग थी कि पेपर लीक और परीक्षा में हुई दूसरी गड़बड़ियों के लिए प्रधान इस्तीफा दें और जवाबदेही तय हो। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, तो आंदोलन की ओर छात्रों और युवा बड़ी संख्या में शामिल होने जंतर मंतर पहुंचे।
वांगचुक की अनशन के दौरान बिगड़ती सेहत ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा और बाद में उनके अस्पताल में भर्ती होने से छात्रों और अन्य लोगों में आक्रोश बढ़ गया। सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद वांगचुक ने अपना 26 दिन का अनशन खत्म कर दिया।
कॉकरोच जनता पार्टी- CJP ने धर्मेंद्र प्रधान का का इस्तीफा नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़पों ने पूरे देश का ध्यान आंदोलन की तरफ खींचा। जिसके बाद सरकार ने रणनीति बदली और सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता में सरकार ने सीजेपी की शर्तों पर सहमति जताई। जिसके बाद सीजेपी ने जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन को खत्म करने की घोषणा की।