
Dipankar Bhattacharya: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शनिवार को इंडिया गठबंधन की होने वाली बैठक को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हम भी यही चाहते हैं कि सभी विपक्षी दल एक साथ आएं। सबसे पहले, INDIA गठबंधन की बैठक मूल रूप से अगस्त में होनी तय थी, लेकिन वह नहीं हो सकी। यह एक सकारात्मक कदम है कि अब 30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक बुलाई गई है।
उन्होंने आगे कहा कि हमारा मानना है कि हमें एक बड़ा जन आंदोलन करना चाहिए। इसके लिए केवल INDIA गठबंधन में शामिल दलों को ही नहीं, बल्कि गठबंधन से बाहर के विपक्षी दलों को भी साथ लाना चाहिए, जिसमें कई क्षेत्रीय दल और जमीनी स्तर पर काम करने वाली ताकतें भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रणाली से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर व्यापक स्तर पर चर्चा की जरूरत है। सीपीआई (एम-एल) नेता ने कहा कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था और भारत की चुनावी प्रणाली ने इससे पहले इतने बड़े संकट का सामना नहीं किया है।
बता दें कि CPI(M-L) नेता की यह टिप्पणी द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में SIR से जुड़ी प्रक्रियाओं और फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।
भट्टाचार्य ने कहा कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस में यह खुलासा सामने आने के बाद पूरे देश में एक ही सवाल उठ रहा है- ज्ञानेश कुमार कब पद छोड़ेंगे?
भट्टाचार्य ने शुक्रवार को दिल्ली में CEC के खिलाफ हुए प्रदर्शन का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को जिस तरह संभाला गया, वह भविष्य में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के लिए चिंताजनक संकेत है।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर, जो लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है, वहां शुक्रवार को बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी देखने को मिली।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया- जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं रह गया है, बल्कि लगभग पुलिस छावनी में बदल गया है।" उन्होंने इसे दिल्ली और देशभर में भविष्य के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक प्रदर्शनों के संदर्भ में गंभीर संकेत बताया।
CPI(M-L) नेता ने चुनाव आयोग के मौजूदा विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, SIR प्रक्रिया को रोकने और कथित तौर पर मताधिकार से वंचित किए गए लोगों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है। उन्होंने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में होने वाले चुनावों का उल्लेख करते हुए SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।