
Delhi University: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के मुखर्जी नगर में दो छात्राओं के कथित पीछा करने और परेशान करने के मामले में तीन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की है। यूनिवर्सिटी ने सोमवार को तीनों छात्रों को तत्काल प्रभाव से उनके कोर्स से सस्पेंड कर दिया और विश्वविद्यालय परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी है। तीनों छात्र DU के लॉ सेंटर-II में LLB की पढ़ाई कर रहे हैं। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की ओर से 23 सितंबर को हुई घटना को लेकर FIR दर्ज किए जाने के बाद की गई है।
यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर कार्यालय की ओर से 28 सितंबर को तीन अलग-अलग नोटिस जारी किए गए। इनमें कहा गया कि 23 सितंबर 2026 की शाम हुई घटना को लेकर दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज FIR के आधार पर छात्रों को दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट, 1922 के Ordinance XV-B की धारा 3(e) के तहत तत्काल प्रभाव से उनके अध्ययन पाठ्यक्रम से निलंबित किया गया है। नोटिस में यह भी कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद तीनों छात्रों के विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
पुलिस के मुताबिक, घटना 23 सितंबर की रात करीब 9:30 बजे हुई थी। एक महिला छात्रा की शिकायत के आधार पर मुखर्जी नगर थाने में मामला दर्ज किया गया। FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 78 (पीछा करना), धारा 79 (महिला की गरिमा का अपमान करने के इरादे से शब्द, इशारा या कृत्य) और धारा 3(5) (साझा मंशा) के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक छात्रा ने बताया कि वह अपनी दोस्त के साथ विजय नगर से लौट रही थी। इसी दौरान कथित तौर पर एक SUV उनके पास आकर रुकी। छात्रा के अनुसार, वाहन में सवार लोगों ने खिड़कियां नीचे कर उनके बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। छात्राओं ने इसका विरोध करते हुए उन्हें वहां से जाने के लिए कहा। आरोप है कि इसके बाद युवकों ने कथित तौर पर गाली-गलौज और अश्लील टिप्पणियां कीं और उनका पीछा किया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर से जारी तीनों नोटिस में छात्रों को निलंबित करने का फैसला बताया गया है, लेकिन घटना में प्रत्येक छात्र की कथित भूमिका क्या थी, इसका अलग-अलग विवरण नहीं दिया गया है। पुलिस की FIR के आधार पर विश्वविद्यालय ने यह कार्रवाई की है। मामले की पुलिस जांच जारी है। विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई फिलहाल FIR में दर्ज आरोपों के आधार पर है।