
Diwali online shopping fraud: त्योहारी सीजन में जहां एक ओर बाजारों में खरीदारी की धूम है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों ने भी जाल बिछा रखा है। दिवाली के बाद तक का समय ऑनलाइन ठगी के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि इस साल शुरुआती आठ महीनों में ही मध्य प्रदेश में साइबर फ्रॉड की 53,530 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 308.35 करोड़ रुपए की ठगी हुई। हालांकि त्वरित कार्रवाई के चलते पुलिस ने 86.16 करोड़ रुपए बचाने में सफलता भी हासिल की, लेकिन जागरूकता ही इस खतरे से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।
फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स: ठग नामी कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉम्र्स से मिलती-जुलती वेबसाइट्स तैयार करते हैं। इन पर असली जैसे दिखने वाले लोगो और भारी छूट के लुभावने विज्ञापन दिखाकर ग्राहकों को फंसाया जाता है। भुगतान के बाद न तो सामान मिलता है और न ही पैसे वापस आते हैं।
बैंक अफसर, डिलीवरी एक्जीक्यूटिव या कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर फोन किए जाते हैं। ऑर्डर कैंसिलेशन, रिफंड, गिफ्ट वाउचर या कैशबैक का झांसा देकर मोबाइल पर फर्जी लिंक भेजी जाती हैं या स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स डाउनलोड करवाकर बैंक खाते खाली कर लिए जाते हैं।
अनजान लिंक पर क्लिक न करें: किसी भी अनजान नंबर या सोशल मीडिया पर आए लुभावने ऑफर के लिंक पर क्लिक करने से बचें।
आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग करें: खरीदारी हमेशा संबंधित ब्रांड के आधिकारिक ऐप या वेराइफाइड वेबसाइट से ही करें। गूगल सर्च में टॉप पर दिखने वाला हर रिजल्ट असली नहीं होता।
ओटीपी या पिन साझा न करें: बैंक अधिकारी या कोई भी सरकारी कर्मचारी कभी भी फोन पर ओटीपी, सीवीवी (CVV), या यूपीआई पिन नहीं मांगता। सचार साथी पोर्टल का उपयोग करें: किसी भी संदिग्ध मैसेज की शिकायत संचार साथी के 'चक्षु' (Chakshu) फैसिलिटी पर करें।