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मैं होता तो कुछ मिनट भी नहीं टिक पाता IAS, महिला अफसर के साथ बदसलूकी पर बरसे फारूक अब्दुल्ला

IAS Officer Controversy: नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने महिला अधिकारी से कथित दुर्व्यवहार के मामले में आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन को जम्मू-कश्मीर से हटाने की मांग की है। उन्होंने अधिकारी के व्यवहार को शर्मनाक बताते हुए इसकी आलोचना की।
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Farooq Abdullah
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला। फाइल फोटो- पत्रिका

Farooq Abdullah: जम्मू-कश्मीर में महिला अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन के व्यवहार पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अधिकारी को फटकार लगनी चाहिए और उन्हें जम्मू-कश्मीर से हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का काम लोगों की शिकायतें सुनना और उनकी समस्याएं दूर करना है, न कि उनके साथ गलत व्यवहार करना।

'जिम्मेदार अधिकारी से ऐसे बर्ताव की उम्मीद नहीं'

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी अधिकारी या मंत्री को जनता की सेवा के लिए जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में लोगों के साथ सम्मान से पेश आना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर महिला अधिकारी के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का वीडियो देखकर उन्हें काफी निराशा हुई। उनका व्यवहार शर्मनाक था और एक जिम्मेदार अधिकारी से ऐसे बर्ताव की उम्मीद नहीं की जाती।

बैठक में महिला अधिकारी पर भड़के थे आईएएस

यह मामला जम्मू-कश्मीर में रोजगार विभाग की सहायक निदेशक बीनीश वानी के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़ा है। आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह वर्चुअल बैठक के दौरान महिला अधिकारी पर चिल्लाते सुनाई दे रहे हैं। वीडियो में वह कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहते हैं' यह घटना ‘मिशन युवा’ की समीक्षा बैठक के दौरान हुई थी। वीडियो सामने आने के बाद अधिकारी के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि किसी अधिकारी को अपने पद का इस्तेमाल इस तरह नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर उनके हाथ में जिम्मेदारी होती तो ऐसे अधिकारी को जम्मू-कश्मीर में कुछ मिनट भी नहीं रहने दिया जाता।

जनता की शिकायतें सुनना अधिकारियों की जिम्मेदारी

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को उन लोगों की बात सुननी चाहिए जो अपनी समस्याएं लेकर उनके पास आते हैं। किसी को चिल्लाकर बाहर जाने के लिए कहना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि सरकारी पद पर बैठे लोगों को अपने व्यवहार का ध्यान रखना चाहिए।

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर भी बोले

दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें यह अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि तानाशाही और हिटलर जैसी कार्यशैली के खिलाफ एक नई लहर शुरू हो रही है। उनके इस बयान को उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध की भूमिका से जोड़ते हुए अपनी राय रखी।

Updated on:
16 Oct 2026 05:17 pm
Published on:
16 Oct 2026 05:10 pm