
Story Of 8 Year Shivaay: उम्र महज आठ साल, लेकिन तन पर खाकी वर्दी और कंधे पर मध्य प्रदेश पुलिस का बैज। सप्ताह में एक दिन ड्यूटी और बाकी दिन स्कूल व पढ़ाई। मध्य प्रदेश के जबलपुर के आठ वर्षीय शिवाय शिंदे को जब भी कोई पुलिस अधिकारी या जवान देखता है, तो गर्व से उसका सीना चौड़ा हो जाता है। पिता की असमय मृत्यु के बाद शिवाय को पुलिस विभाग में बाल आरक्षक के पद पर नियुक्ति मिली है। वर्दी में उसे देखकर अधिकारियों और जवानों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है, मानो पिता का सपना बेटे के रूप में फिर से खड़ा हो गया हो। शिवाय और उसकी मां ने इसे केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक फर्ज के रूप में स्वीकार किया है। पति के निधन के बाद बेटे को खाकी वर्दी में देखकर कभी-कभी मां प्रियंका की आंखें भर आती हैं, तो कभी वह उसे देशभक्ति, जनसेवा और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाती हैं।
शिवाय अकेला नहीं है। जबलपुर पुलिस में वर्तमान में 10 बाल आरक्षक हैं, जिनकी उम्र 8 से 17 वर्ष के बीच है। इनमें एक बालिका भी शामिल है। ये सभी वे बच्चे हैं, जिनके पिता पुलिस विभाग में सेवा के दौरान दिवंगत हो गए। अनुकंपा नियुक्ति के तहत इन्हें बाल आरक्षक बनाया गया है। 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर ये नियमित आरक्षक बनेंगे और पुलिस की औपचारिक ट्रेनिंग प्राप्त करेंगे।
पति के निधन के बाद शिवाय की मां प्रियंका ने बेटे को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि पिता की जिम्मेदारी और उनकी विरासत समझाई। वह कहती हैं कि खाकी केवल वर्दी नहीं, बल्कि कर्तव्य और ईमानदारी का प्रतीक है। इसी कारण वह बेटे को हमेशा फर्ज के रास्ते पर चलने की सीख देती हैं।
बाल आरक्षकों को सप्ताह, पखवाड़े या माह में एक बार पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उपस्थित होना होता है। यहां उनकी सांकेतिक हाजिरी दर्ज की जाती है। कुछ समय कार्यालय में रहने के बाद उन्हें वापस भेज दिया जाता है। बाल आरक्षक के रूप में उन्हें निर्धारित मानदेय भी मिलता है।
पुलिस विभाग में ऐसे कई अधिकारी और कर्मचारी हैं, जिन्होंने कभी बाल आरक्षक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। बालिग होने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया और आज नियमित रूप से पुलिस सेवा में कार्यरत हैं।
| क्रमांक | बाल आरक्षक का नाम | जन्म वर्ष |
|---|---|---|
| 1 | शिवाय शिंदे | 2018 |
| 2 | जिगर इनवाती | 2016 |
| 3 | हर्ष सिंह | 2016 |
| 4 | नमन मरावी | 2014 |
| 5 | आहिल अली रिजवी | 2013 |
| 6 | स्वाती मालवीय | 2010 |
| 7 | आर्यन ठाकुर | 2010 |
| 8 | अथर्व तिवारी | 2009 |
| 9 | विक्रम प्रताप सिंह | 2009 |
| 10 | हर्ष बस्तवार | 2008 |
पुलिस विभाग उन चुनिंदा विभागों में शामिल है, जहां किसी अधिकारी या जवान की सेवा काल में मृत्यु होने पर उसके नाबालिग बेटे या बेटी को भी अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है। बालिग होने तक उन्हें बाल आरक्षक के रूप में रखा जाता है और बाद में नियमित नियुक्ति प्रदान की जाती है।
एएसपी सूर्यकांत शर्मा बताया कि पुलिस विभाग में किसी अधिकारी या जवान की मृत्यु होने पर उसके नाबालिग या बालिग बेटे-बेटी को अनुकंपा नियुक्ति दी जाती है। नाबालिग बच्चों को बाल आरक्षक के रूप में रखा जाता है। बालिग होने पर उन्हें आरक्षक पद की ट्रेनिंग देकर नियमित सेवा में लिया जाता है।