
FCRA Amendment Bill:: लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में संशोधन से जुड़े विधेयक पर विचार और उसे पारित करने का कार्य सूचीबद्ध किया गया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में उन NGO के लिए विदेशी फंडिंग के नियमों को सख्त किया है जिन पर धार्मिक धर्मांतरण में मदद करने का आरोप है। विधेयक में प्रस्तावित संशोधन को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने प्रस्तावित FCRA संशोधनों का कड़ा विरोध करने की घोषणा की है।
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (Foreign Contribution Regulation Act) भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण सुरक्षा और निगरानी कानून है। भारत में विदेशों से धन और चंदे की राशि की आवक इसी कानून से नियंत्रित होती है। केंद्र सरकार कानून के जरिए निगरानी रखती है कि देश में आए विदेशी धनराशि का उपयोग देश की आंतरिक सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ न हो। लोकसभा में प्रस्तावित चर्चा में विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों में आगे किए जाने वाले बदलाव तय होंगे।
लोकसभा में प्रस्तावित संशोधन विधेयक पर भविष्य में विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों में संशोधन को लेकर चर्चा होनी है। केंद्र सरकार ने हाल ही में उन NGO के लिए विदेशी फंडिंग के नियमों को सख्त किया है जिन पर धार्मिक धर्मांतरण में मदद करने का आरोप है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने प्रस्तावित FCRA संशोधनों का विरोध करने की घोषणा की है।
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के तहत देश के किसी भी गैर-सरकारी संगठन (NGO), ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थान या धार्मिक संगठन को विदेशों से चंदा प्राप्त करना है, तो उन्हें इस कानून के तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय से 'एफसीआरए पंजीकरण' या अनुमति लेना अनिवार्य है।
इस कानून के नियमों के तहत प्राप्तकर्ता संस्थाओं को प्राप्त आर्थिक मदद में मिली राशि का हिसाब, विदेशी चंदे का मूल स्रोत और उस धन के उपयोग (सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक आदि) का पूरा ब्योरा सरकार को देना जरूरी है। केंद्र सरकार ने कानून में 2020 और 2026 के संशोधनों में कड़े प्रावधान किए हैं, जिसके तहत किसी भी गैरकानूनी गतिविधि या धर्मांतरण आदि के लिए विदेशी धन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है।