
भारत (India) की पहली बुलेट ट्रेन (Bullet Train) का सपना साकार होने के करीब है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना पर तेज़ी से काम हो रहा है और अगस्त 2027 तक सूरत-वापी (Surat-Vapi Route) के करीब 100 किलोमीटर सेक्शन पर बुलेट ट्रैन शुरू करने की तैयारी है। यह देश में हाई स्पीड रेल युग की शुरुआत होगी और अब शहरों की दूसरे शहरों से और गांवों से कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी।
इसके बाद यह सर्विस चरणबद्ध तरीके से मुंबई और अहमदाबाद तक बढ़ाई जाएगी। करीब एक दशक से चल रही 508 किलोमीटर की परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नागर हवेली से होकर गुजरेगी। जापानी शिंकानसेन तकनीक वाले इस प्रोजेक्ट को 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और जापान (Japan)के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे (Shinzo Abe) ने शुरू किया था। सूरत-वापी के करीब 86% हिस्से में ट्रैक बिछ चुका है और यह परियोजना का पहला चरण होगा। पूरे कॉरिडोर की भौतिक प्रगति 61% पार कर चुकी है और करीब 91 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
भविष्य में देश में हाई स्पीड ट्रेन के कुछ नए गलियारे मनाए जाएंगे। इन रास्तों में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलूरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलूरु, दिल्ली-वाराणसी शामिल हैं।
इस परियोजना का लक्ष्य शुरुआत में 2023 तक काम पूरा करने का था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। महाराष्ट्र में 2021 तक गति धीमी रही; 2022 में राज्य स्तर पर समन्वय बनने के बाद काम में तेज़ी आई। उद्धव ठाकरे की सरकार के समय यह बड़ी बाधा रही, जिससे काम प्रभावित हुआ। कोविड के दौरान निर्माण की गति ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय-घरेलू सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई, जिसका असर परियोजना की रफ्तार पर पड़ा। कई जगह बिजली की हाई-टेंशन लाइनों, पाइपलाइनों और टेलीकॉम केबलों के 1,651 पॉइंट नागरिक सेवाएं बाधित किए बिना स्थानांतरित करना जटिल रहा। इसके अलावा तकनीकी/भौगोलिक चुनौती भी देखने को मिली, जिनमें समुद्र के नीचे 21 किलोमीटर सुरंग और भारी वर्षा वाले इलाकों की 24 प्रमुख नदियों पर विशाल पुल बनाना शामिल हैं, जो इस परियोजना के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। वर्तमान अनुमानित लागत करीब 1.08 लाख करोड़ रुपए है। देरी के कारण अंतिम लागत करीब 2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है।