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दो से ज़्यादा संतान पर चुनाव लड़ने से रोक के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट कर सकता है पुनर्विचार

सुप्रीम कोर्ट जल्द ही अपने एक पुराने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है। क्या है यह फैसला? आइए नज़र डालते हैं।
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मुंबई

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Tanay Mishra

Aug 05, 2026

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) देश के विभिन्न राज्यों में पंचायत और शहरी निकाय के चुनाव में दो से ज़्यादा संतान वाले लोगों के चुनाव लड़ने पर लगी रोक के अपने पुराने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है। हालांकि यह रोक कब हटेगी, फिलहाल इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। इस संबंध में मंगलवार को महाराष्ट्र के एक मामले की सुनवाई के दौरान अपनी मंशा व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

कौन करेगा फैसला?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि वो इस बात निर्णय करेगा कि पूर्व में जावेद बनाम हरियाणा सरकार (2003) मामले पर पुनर्विचार किया जाए या इसे बड़ी बेंच को सौंपा जाए।

क्यों लगी है रोक?

भारत के कई राज्यों में स्थानीय निकाय (पंचायत और नगरपालिका) चुनाव लड़ने के लिए दो या इससे कम बच्चे होने चाहिए और ऐसा नहीं होने पर माता-पिता इस चैंपियनशिप जीतने का सपना टूट जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन को बढ़ावा देना था। नेताओं को समाज के लिए आदर्श बनना चाहिए, ताकि लोग छोटे परिवार अपनाएं। यह नीति 1990 के दशक में शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में जावेद बनाम हरियाणा मामले में इसे वैध ठहराया, क्योंकि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं है। अब कई राज्यों में प्रजनन दर घटने के कारण यह नियम हटाया जा रहा है।

क्या इस तरह की रोक है प्रासंगिक?

महाराष्ट्र के मामले में याचिकाकर्ता पंचायत प्रतिनिधि मंगला को कलक्टर ने दो से ज़्यादा संतान होने के कारण पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। मंगला ने बॉम्बे हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी जो स्वीकार नहीं की गई। मंगला ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी लेकिन याचिका का दायरा बढ़ाते हुए यह विचारणीय प्रश्न बनाया था कि क्या घटती प्रजनन दर को देखते हुए इस तरह की रोक प्रासंगिक है? कोर्ट ने राज्याें में इस बारे में परिस्थिति का संकलन करने को कहा था।

राजस्थान, एमपी और छग ने हटाया ऐसा नियम

कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रुक्मिणी बोबड़ और प्रतीक बोंबार्डे ने राज्यों के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि सात राज्यों ने दो-बच्चे के नियम को निरस्त कर दिया है, जबकि पंद्रह राज्यों में ऐसी कोई नीति नहीं है। असम, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड में यह नियम अभी बरकरार है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ ने यह नियम 2005 में जबकि राजस्थान ने हाल ही यह नियम हटा दिया है।