
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)
आम नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट और अन्य साइबर अपराधों से ठगी का शिकार बनने से रोकने और प्रभावित लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) राहत की उम्मीद लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय रिज़र्व बैंक - आरबीआई (Reserve Bank of India - RBI) को साइबर अपराधों से जुड़े बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के लिए 4 सप्ताह में मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे अपराधों से निपटने और रोकने के लिए राज्य सरकारों, बैंकों, जांच एजेंसियों और अदालतों को भी कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी.मोहना की बेंच ने डिजिटल अरेस्ट के स्वत: प्रसंज्ञान मामले की सुनवाई के बाद यह निर्देश जारी किया। बेंच ने आदेश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पीड़ितों के लिए शिकायत निवारण और ठगी की रकम के वसूली तंत्र के कामकाज में तेज़ी लाने का निर्देश दिया है। बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से एक अंतर-विभागीय समिति बैंकों और वित्तीय मध्यस्थों से डिजिटल अरेस्ट घोटालों को रोकने और पीड़ितों को धोखाधड़ी से प्राप्त धन की वसूली में मदद करने के तरीकों पर चर्चा कर तंत्र तैयार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों के निपटान में ज़्यादा जवाबदेही की ज़रूरत बताते हुए साइबर धोखाधड़ी निवारण तंत्र के तहत दर्ज और निपटाई गई शिकायतों का राज्यवार और बैंकवार विवरण मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इन आंकड़ों से राज्यों और बैंकिंग संस्थानों में शिकायतों के निपटान के तरीके की स्पष्ट तस्वीर मिलने की उम्मीद है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को तय की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट मामलों से निपटने में प्रगति पर संतोष जताया। अदालत में पेश राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) की रिपोर्ट के हवाले से बेंच ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट मामलों की शिकायतों की संख्या 2024 में 1,23,672 से घटकर 2025 में 58,249 हो गई और 30 जून, 2026 तक यह घटकर 16,377 रह गई। धोखाधड़ी से हुए नुकसान की राशि में भी काफी कमी आई है लेकिन इस मामले में निरंतर निगरानी ज़रूरी है।
Updated on:
05 Aug 2026 02:18 am
Published on:
05 Aug 2026 02:13 am
