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कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता नहीं होने पर जस्टिस भुइयां ने कहा – ‘जज नियुक्ति के कारण नहीं बताना न्यायपालिका का नुकसान’

कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। क्या कहा जस्टिस भुइयां ने? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

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Updated: 2 Aug 2026, 2:14 AM IST

Ujjal Bhuyan

जस्टिस उज्जल भुइयां

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जस्टिस उज्जल भुइयां (Ujjal Bhuyan) ने कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता नहीं होने की आलोचना करते हुए कहा है कि जजों की नियुक्ति के कारण का खुलासा नहीं होने से न्यायपालिका को नुकसान हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठता में तेरहवें नंबर पर जस्टिस भुइयां ने कहा कि नियुक्ति नहीं किए जाने का कारण न बताकर कॉलेजियम ऐसे जजों के साथ अन्याय कर रहे हैं जिन्होंने अथक परिश्रम किया है। साथ ही नियुक्ति होने का कारण न बताकर न्यायपालिका में कुछ ऐसे लोगों को प्रवेश करने की अनुमति दे रहे हैं जो बाद में समाज के एक वर्ग के लिए 'चींटियां' जैसी असंवैधानिक टिप्पणियाँ करते हैं और उनका कुछ नहीं होता। जस्टिस भुइयां ने सवाल उठाते हुए कहा कि कारण बताने से क्या नुकसान होता है? न्यायपालिका में ऐसे लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए कुछ चर्चा होनी चाहिए, कारण बताए जाने चाहिए। उन्होंने 'विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी' के कार्यक्रम में यह बात कही।

जानने का अधिकार कि कौन क्यों बना जज

जस्टिस भुइयां ने कहा कि खुली अदालतों और जनता के जानने के अधिकार का सिद्धांत जजों की नियुक्ति के बारे में जानकारी पर भी लागू होना चाहिए। नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके जज कौन होंगे, उन्होंने किस प्रकार के फैसले सुनाए हैं। यह सब सार्वजनिक होना चाहिए।

पदोन्नति और तबादलों पर चर्चा गोपनीय क्यों?

जस्टिस भुइयां ने कहा कि जजों की पदोन्नति और तबादलों पर विचार-विमर्श गोपनीय रहता है और किसी सिफारिश को अस्वीकार करने या स्थगित करने के कारणों का खुलासा शायद ही कभी पूरी तरह से किया जाता है। इसके मापदंड सार्वजनिक रूप से सुलभ दस्तावेज में मौजूद नहीं हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पिछले तीन ज्ञानों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें जजों की पदोन्नति की सिफारिश करने का कोई कारण नहीं बताया गया है, जबकि इससे पहले के ज्ञापनों में एक ही कारण बताया गया।

क्या है कॉलेजियम प्रणाली?

जजों की नियुक्ति की सिफारिश के लिए सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में वरिष्ठतम जजाें का कॉलेजियम होता है। हाईकोटों में नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर विचार कर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम सरकार को नियुक्ति की सिफारिश करता है। सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की सिफारिश और हाईकोर्ट जजाें के तबादले की सिफारिश सीधे सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से सरकार के पास जाती है।