जस्टिस भुइयां ने कहा कि जजों की पदोन्नति और तबादलों पर विचार-विमर्श गोपनीय रहता है और किसी सिफारिश को अस्वीकार करने या स्थगित करने के कारणों का खुलासा शायद ही कभी पूरी तरह से किया जाता है। इसके मापदंड सार्वजनिक रूप से सुलभ दस्तावेज में मौजूद नहीं हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पिछले तीन ज्ञानों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें जजों की पदोन्नति की सिफारिश करने का कोई कारण नहीं बताया गया है, जबकि इससे पहले के ज्ञापनों में एक ही कारण बताया गया।