
Iran US Conflict: भारत के वरिष्ठ पूर्व राजनयिक सुरेंद्र कुमार ने सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बदलते सैन्य और कूटनीतिक रुख की आलोचना करते हुए कहा कि वैश्विक प्रभाव वाले फैसलों में अनिश्चितता के कारण पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट "कॉमेडी" जैसा बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय तनाव कम करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम स्वागतयोग्य है। हालांकि, वाशिंगटन और तेहरान दोनों ही घरेलू राजनीतिक साख बनाए रखते हुए इस संघर्ष को समाप्त करने की चुनौती से जूझ रहे हैं।
सैन्य कार्रवाई की धमकियों और अचानक बातचीत की पेशकशों के बीच बार-बार बदलते रुख का उल्लेख करते हुए सुरेंद्र कुमार ने कहा कि इतने गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट से निपटने में स्थिरता और स्पष्टता का अभाव चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, "यह पूरा घटनाक्रम एक कॉमेडी जैसा होता जा रहा है। जिन फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है, उनमें कुछ हद तक पूर्वानुमान और निश्चितता होनी चाहिए। यदि आप हर 24 घंटे या हर सप्ताह अपना रुख बदलते रहेंगे, तो इसका असर दुनिया के कई देशों और लोगों पर पड़ेगा।"
उन्होंने आगे कहा, "यदि वास्तव में तनाव कम होता है, होर्मुज़ जलडमरूमध्य फिर से खुलता है और क्षेत्र में दुश्मनी घटती है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन यह स्थिति कितने समय तक बनी रहेगी, यह कहना मुश्किल है।"
सुरेंद्र कुमार ने कहा कि लंबे समय से जारी तनाव ने दोनों पक्षों को थका दिया है, लेकिन सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती यह है कि अमेरिका और ईरान, दोनों अपने-अपने नागरिकों के सामने खुद को विजेता के रूप में पेश करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, "इस पूरे घटनाक्रम के कई पहलू हैं। पहला, दोनों पक्ष इस संघर्ष से थक चुके हैं। दूसरा, दोनों इसे समाप्त करना चाहते हैं। तीसरा, दोनों अपने-अपने लोगों को यह दिखाना चाहते हैं कि जीत उनकी हुई है। यही सबसे बड़ी समस्या है। आप संघर्ष को खत्म भी करना चाहते हैं और साथ ही अपने नागरिकों के सामने जीत का दावा भी करना चाहते हैं।"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नियोजित सैन्य कार्रवाई टालने और यह दावा किए जाने पर कि ईरान ने संयम बरतने की अपील की थी, सुरेंद्र कुमार ने संदेह जताया।
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान ने 'प्लीज़, प्लीज़, प्लीज़' कहते हुए संयम बरतने की अपील की। लेकिन ईरान निश्चित रूप से कहेगा कि उसने ऐसा कोई संदेश नहीं भेजा। वास्तव में यह मानना कि ईरानी इस तरह गिड़गिड़ाएंगे, बेहद अविश्वसनीय लगता है।"