
ईरान के खातम अल-अंबिया के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही (फोटो- X@TheCradle)
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति वैसी ही बनी हुई है। ईरान तय कर रहा है कि कौन से जहाज खाड़ी में प्रवेश करें या बाहर निकलें। बिना अनुमति के जाने वाले जहाजों पर हमले भी हो रहे हैं। कंट्रोल रिस्क्स के एनालिस्ट आरोन केनेडी के अनुसार, होर्मुज में दो गलियारे हैं। उत्तरी गलियारा ईरान के नियंत्रण वाला है, जिस पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी है। दक्षिणी गलियारा ओमान के तट के पास है। अमेरिका वहां सीमित सुरक्षा दे रहा है, लेकिन ईरानी हमलों को पूरी तरह रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है।
ओमान के प्रोफेसर अब्दुल्ला बाबूद ने अल जजीरा से बात करते हुए कहा है कि मस्कट ईरान के होर्मुज पर नियंत्रण के खिलाफ है, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और अंतरराष्ट्रीय संधियों के खिलाफ है। फिर भी ओमान तेहरान के साथ समझौता खोज रहा है। वह सुरक्षित नौवहन के लिए सेवा शुल्क लेने को तैयार है। ओमान दोनों पक्षों से बात करने में माहिर और विश्वसनीय है। बातचीत में कुछ सफलता भी मिल रही है। ये चर्चाएं अमेरिका-ईरान मुद्दों से जुड़ी हुई हैं।
सोमवार को ईरान ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को फांसी पर लटका दिया। फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक फांसी पाने वालों के नाम उमीद बेहजाद और पौरिया सफवत हैं। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि दोनों इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम कर रहे थे। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक जून 2025 में अमेरिका-ईरान जंग के दौरान दोनों आरोपियों ने इजरायल को खुफिया जानकारी दी थी।
ईरानी शासन के अनुसार, दोनों आरोपियों ने सेना और सुरक्षा केंद्रों की तस्वीरें, सटीक लोकेशन और अंदर की जानकारी मोसाद के लोगों तक पहुंचाई, जिससे उन ठिकानों पर हमला करना आसान हो गया। अदालत में जो सबूत पेश किए गए उनमें आरोपियों और इजरायली अफसरों के बीच हुई बातचीत के मैसेज भी शामिल थे। फार्स की रिपोर्ट में एक मैसेज का जिक्र है जिसमें आरोपी अपने हैंडलर को लिखता है, 'मेरे पास ड्रोन या फाइटर जेट पर फायरिंग का वीडियो भी है, लेकिन इंटरनेट कमजोर होने की वजह से भेज नहीं पा रहा। शुक्रिया, हजरत मूसा के सैनिकों!'
इससे पहले जनवरी में भी ईरान ने एक शख्स को इसी आरोप में फांसी दी थी। सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने उसका नाम अली अर्देस्तानी बताया था। रिपोर्ट के मुताबिक उसे मोसाद के लिए काम करने के बदले क्रिप्टोकरेंसी में पैसे मिलते थे। उसे उम्मीद थी कि उसे 10 लाख डॉलर के साथ ब्रिटेन का वीजा भी मिलेगा। IRNA ने उसे इजरायल का खास एजेंट बताया था जो संवेदनशील जगहों की फोटो और वीडियो मोसाद को भेजता था। एजेंसी के मुताबिक उसे ऑनलाइन ही भर्ती किया गया था और उसका मामला निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक गया।
मानवाधिकार संगठन और पश्चिमी देश ईरान में फांसी की सजा के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की आलोचना करते रहे हैं। खासकर राजनीतिक और जासूसी के मामलों में। एक्टिविस्ट्स का कहना है कि कई मामलों में जबरदस्ती कबूलनामे लिए जाते हैं और मुकदमे बंद कमरे में होते हैं। वकीलों की स्वतंत्र पहुंच भी नहीं दी जाती। ईरान सरकार इन आरोपों को खारिज करती है और कहती है कि फांसी पाए लोग दुश्मन खुफिया एजेंसियों के एजेंट थे जो आतंक या तोड़फोड़ में शामिल थे।
नॉर्वे स्थित संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार साल 2025 में ईरान में कम से कम 1500 फांसी दी गईं। संगठन के डायरेक्टर महमूद अमीरी-मोगद्दम ने कहा कि पिछले 35 साल में इतनी बड़ी संख्या कभी नहीं देखी गई।ये घटनाएं दिखाती हैं कि ईरान और इजरायल के बीच तनाव अभी भी जारी है। दोनों देश एक-दूसरे पर जासूसी और हमलों का आरोप लगाते रहते हैं। ईरान का दावा है कि वह अपने अंदर घुसपैठ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।
Updated on:
03 Aug 2026 06:59 pm
Published on:
03 Aug 2026 06:59 pm
