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Petrol Diesel Price: पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार का ऐलान, पेट्रोल-डीजल की कीमतें काबू में रखने का वादा

Fuel prices: केंद्र सरकार ने कहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए जरूरत के अनुसार कदम उठाए जाते रहेंगे। सरकार ने कहा कि उपभोक्ताओं पर बढ़ती वैश्विक कीमतों का असर कम करने की कोशिश जारी है।
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Petrol Diesel Price

पेट्रोल पंप। फाइल फोटो- पत्रिका

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उससे तेल एवं गैस की कीमतों में आई तेजी के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि वह पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए आगे भी आवश्यक वित्तीय और प्रशासनिक कदम उठाती रहेगी। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं पर बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों का बोझ कम से कम पड़े, इसके लिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि इस साल सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी।

आम उपभोक्ताओं को राहत मिली

यह फैसला पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों में आई तेजी के प्रभाव को कम करने के लिए लिया गया था। मंत्री ने बताया कि शुल्क में इस कटौती के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार को लगभग 1.23 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को भी बढ़ती लागत के दबाव से कुछ हद तक राहत मिली।

जरूरत के अनुसार कदम उठाएगी सरकार

उन्होंने कहा कि उत्पाद शुल्क में कमी से सरकारी तेल कंपनियों की ओर से वहन की जा रही आंशिक घाटे की स्थिति को संतुलित करने में मदद मिली, जिससे वे बिना किसी व्यवधान के देश भर में ईंधन की आपूर्ति जारी रख सकीं। पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार भविष्य में भी ईंधन कीमतों में होने वाली अस्थिरता के प्रभाव को कम करने के लिए जरूरत के अनुसार कदम उठाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे उपायों से देश की वित्तीय स्थिति पर अनावश्यक दबाव न पड़े और राजकोषीय अनुशासन बना रहे। सरकार की रणनीति राजस्व और खर्च के रुझानों पर लगातार नजर रखने, प्राथमिकताओं के अनुसार सरकारी व्यय में बदलाव करने और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप आवश्यक वित्तीय फैसले लेने पर आधारित है।

कई मोर्चों पर काम कर रही सरकार

मंत्री के अनुसार, इससे भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आने वाली तेजी जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपट सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार बजटीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने, व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और राजकोषीय संतुलन के लक्ष्य पर आगे बढ़ने के साथ-साथ ऐसे झटकों का सामना करने की क्षमता भी बनाए रखेगी। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार कई मोर्चों पर काम कर रही है, जिसमें कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाना, सामरिक पेट्रोलियम भंडार का विस्तार, वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देना तथा ऊर्जा दक्षता में सुधार जैसे कदम शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था बाहरी ऊर्जा झटकों के प्रति कम संवेदनशील बनेगी और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। इस बीच, सरकार ने जुलाई में रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी कच्चे तेल की खरीद भी बढ़ा दी, जो उस महीने देश के कुल तेल आयात का 50 प्रतिशत से अधिक था। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने और आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति का हिस्सा है।