
Pinarayi Vijayan political attack on the UDF Government : केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने राज्य के हित के मुददों पर यूडीएफ सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। विजयन ने कहा, 'सबरीमाला में सोने की चोरी के मामले में 'स्मार्ट क्रिएशन्स' की भूमिका के बारे में सभी जानते हैं। 'स्मार्ट क्रिएशन्स' के वकील को देवस्वोम स्पेशल प्लीडर नियुक्त करना बहुत संदिग्ध कदम था। उन्होंने आरोप लगाया कि सबरीमाला में सोने की चोरी के मामले को पर्दे के पीछे कमजोर करने की हर संभव कोशिश की जा रही है। देवस्वोम प्लीडर के तौर पर नियुक्त वकील वही व्यक्ति था जिसने आरोपियों के हितों का बचाव किया था। यह नियुक्ति जल्दबाजी में की गई थी। विजयन ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा क्यों किया गया? मामला प्लीडर के पद से उनके इस्तीफे के साथ खत्म नहीं हो जाता। उन्हें सबरीमाला सोने की चोरी के मामले से जुड़ी देवस्वोम विभाग के पास मौजूद अहम जानकारी के बारे में पता चल गया होगा। अगर उनके पास कोई दस्तावेज हैं, तो जांच कर पता लगाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया, 'MG यूनिवर्सिटी में अस्थायी कुलपति की नियुक्ति के मामले में राज्यपाल के रवैये पर UDF सरकार का क्या रुख था? संघ परिवार से जुड़े एक शिक्षक संगठन के नेता को एमजी यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर बनाया गया। आम तौर पर, इसका विरोध करना चाहिए था। लेकिन सरकार की तरफ से ऐसा कोई विरोध नहीं हुआ। यूनिवर्सिटी सीनेट में परिवार के 19 सदस्यों को शामिल किया गया है। ऐसे में, सत्ताधारी सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह अपनी राय रखे और ऐसे कामों का विरोध करे। फिर भी, न तो सरकार और न ही यूडीएफ का राजनीतिक नेतृत्व ऐसा करने के लिए तैयार था। उच्च शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि गवर्नर के साथ किसी भी तरह का टकराव नहीं होगा। गवर्नर का रुख आरएसएस के हितों को साधने वाला है। यूडीएफ सरकार का रवैया आरएसएस के रुख के सामने पूरी तरह से घुटने टेकने जैसा रहा है। इस संदर्भ में, मुख्यमंत्री का जवाब बहुत गुमराह करने वाला है। केंद्र में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद ही यूनिवर्सिटी के मामलों में गवर्नर का दखल शुरू हुआ।'
पिनाराई विजयन ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लचर बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री पर सवालों की बौछार करते हुए कहा कि वे पिछली सरकार के कार्यकाल में केरल में बीमारी फैलने पर सत्ता में बैठे लोगों की आलोचना और बुराई करने में सबसे आगे रहते थे कि हम इस स्थिति को उसी नजरिये से नहीं देखते। ऐसा लगता है कि वे वरिष्ठ अधिकारियों पर दोष मढ़ कर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं। बीमारी फैलना और वायरस का प्रसार इस बात पर निर्भर नहीं करता कि सत्ता में कौन है। उम्मीद है कि पद संभालने के एक महीने के अंदर ही उन्हें यह बात समझ में आ गई होगी। '
विजयन ने प्रदेश में निपारह वायरस मामले पर भी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, राज्य में निपाह की दोबारा पुष्टि हुए चार दिन हो चुके हैं। निपाह वायरस फैलने से रोकने के लिए सरकार की ओर से अभी भी कोई सही तालमेल नहीं दिख रहा है। इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री का जवाब सही नहीं था। हम निश्चित रूप से निपाह का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर नहीं करना चाहते, जैसा कि विपक्ष ने तब किया था जब राज्य में पहले निपाह का प्रकोप फैला था। हम निपाह के खिलाफ लड़ाई में हर संभव सहयोग देंगे।
उन्होंने निपाह वायरस मामले में कहा कि मुख्य समस्या उन लोगों के बीच भ्रम की स्थिति है जो हालात संभालने के लिए जिम्मेदार हैं। यह ऐसा समय है जब इस इसका प्रकोप रोकने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन, जिन्हें ऐसी स्थिति में नेतृत्व करना चाहिए, वे तालमेल के बिना काम कर रहे हैं, जो सही नहीं है ।'