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गांव की सरपंच बन बेटियां सीख रहीं नेतृत्व के गुर, महिलाओं की कई समस्याओं का किया समाधान

Gandhinagar: बचपन से ही नेतृत्व के गुण विकसित करने के लिए गुजरात में की जा रही पहल देशभर के लिए प्रेरणा के बीज बो रही है।

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Gandhinagar: बचपन से ही नेतृत्व के गुण विकसित करने के लिए गुजरात में की जा रही पहल देशभर के लिए प्रेरणा के बीज बो रही है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में बालिका पंचायत बनाकर एक बालिका को सरपंच निर्वाचित किया जाता है और अन्य सदस्य अथवा पंच के तौर पर काम करती हैं। बालिका पंचायत में अधिकांशत: 11 से 16 तक की बालिकाओं को चयनित किया जाता है। बालिका पंचायत गांवों की समस्याओं के समाधान तलाशने में सहयोग करती है। साथ ही गांव का विकास कैसेे हो, बिजली, पानी सड़क की सुविधाओं के साथ स्वच्छता बनाए रखने के प्रयासों में भी हाथ बंटाती हैं।

गांधीनगर जिले ने 262 ग्राम पंचायतों में बनाई बालिका पंचायत

इसी क्रम में गुजरात की राजधानी गांधीनगर के जिला प्रशासनिक क्षेत्र की चार तहसीलों की 262 ग्राम पंचायतों में बालिका पंचायत गठित की गई है। जिले की देहगाम तहसील का कडजोडरा गांव जिले का पहला ऐसा गांव है, जहां दिसंबर, 2023 में सबसे पहले बालिका पंचायत की स्थापना की गई थी। कडजोडरा गांव के सरपंच अर्जुन सिंह झाला बताते हैं कि गांव की 11 से 16 वर्ष तक की 13 बेटियों को एकत्रित कर गांव में बालिका पंचायत की स्थापना की गई। इसमें 15 वर्षीय दिया त्रिवेदी बालिका सरपंच है। हर महीने दो बार बालिका पंचायत की सभा होती है।

हल की महिलाओं की समस्याएं

बालिका सरपंच दिया त्रिवेदी ने बताया कि गांव की कई बहनों की समस्याओं का समाधान बालिका पंचायत के माध्यम से हुआ है। हर हफ्ते गांव में घर-घर जाकर समस्याएं जानने की कोशिश करते हैं। बालिका पंचायत गांव की बेटियों की आवाज बन गई है और बेटियों को आगे बढ़ने में भी मदद करती है। ये पंचायत बालिकाओं और महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाने में मददगार हो रही है। सेनेटरी पैड का वितरण, कुकिंग प्रतियोगिता, हेयरस्टाइल प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता के जरिए प्रतिभा को तराशा जा रहा है।

Published on:
05 Aug 2024 01:56 pm
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